Reality: 100 करोड़ के हॉस्पिटल का ‘फ्रेक्चर’ और बीच सड़क पर ‘चक्की’ का क्या है राज?

नमस्कार, राजस्थान के सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली खबरें आज सुर्खियों में हैं। जहां एक तरफ झुंझुनूं में डॉक्टर को एक्सरे में फ्रैक्चर नहीं दिखता, वहीं दूसरी ओर दौसा के लालसोट में 100 करोड़ की लागत से बने नए अस्पताल में बड़ी-बड़ी दरारें किसी को नजर नहीं आ रही हैं। राजनीति और…

झुंझुनूं से बिजौलिया तक: सिस्टम की अनदेखी और जनता की बेबसी

नमस्कार, राजस्थान के सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली खबरें आज सुर्खियों में हैं। जहां एक तरफ झुंझुनूं में डॉक्टर को एक्सरे में फ्रैक्चर नहीं दिखता, वहीं दूसरी ओर दौसा के लालसोट में 100 करोड़ की लागत से बने नए अस्पताल में बड़ी-बड़ी दरारें किसी को नजर नहीं आ रही हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही कड़वी सच्चाइयों के साथ पेश है आज की रिपोर्ट।

1. न फ्रैक्चर दिखा, न ‘दरारें’: सिस्टम की लीपापोती

झुंझुनूं के सरकारी अस्पताल में एक मरीज को डॉक्टर ने मामूली चोट बताकर घर भेज दिया, लेकिन जब दर्द असहनीय हुआ तो प्राइवेट अस्पताल में पता चला कि पसली में गंभीर फ्रैक्चर है। जब मरीज ने डॉक्टर से सवाल किया तो जवाब मिला- “मैं अनपढ़ हूं, मुझे बाहर निकाल दो।” यह सिर्फ एक डॉक्टर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता है।

दौसा के लालसोट में 100 करोड़ रुपये की लागत से बना नया अस्पताल भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। नई इमारत की दीवारों में पड़ी लंबी दरारों को छुपाने के लिए एल्युमिनियम की परतें चिपका दी गई हैं। पीएमओ का दावा है कि ये दरारें ड्रेनेज पाइपलाइन की वजह से हैं और इनसे कोई खतरा नहीं है। क्या वाकई सिस्टम में सब कुछ ठीक है?

2. अलवर: जब जिला प्रमुख को भेंट करनी पड़ी ‘आटा चक्की’

अलवर जिला परिषद की बैठक में एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। निर्दलीय पार्षद संदीप फौलादपुरिया ने सदन में एक आटा चक्की लाकर खड़ी कर दी। यह विरोध केंद्रीय मंत्री द्वारा शाहजहांपुर में उद्घाटन की गई ‘आटा प्रोसेसिंग यूनिट’ के खिलाफ था।

  • विरोध का कारण: क्षेत्र के किसानों को नहर और पानी की जरूरत थी, लेकिन उन्हें चक्की थमा दी गई।
  • पार्षद का तंज: पार्षद ने कहा कि जब पानी नहीं तो अनाज नहीं, और अनाज नहीं तो चक्की का क्या काम?
  • मांग: जनता को ट्रॉमा सेंटर, एंबुलेंस और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत थी, न कि चक्की की।

पार्षद ने यह चक्की जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर को सौंपी ताकि वे इसे मंत्रीजी को वापस लौटा सकें। यह घटना दर्शाती है कि जनता की वास्तविक जरूरतों के प्रति जनप्रतिनिधि कितने उदासीन हैं।

3. बिजौलिया: ऐतिहासिक धरती पर विकास का ‘अजीब नमूना’

बिजौलिया वही ऐतिहासिक भूमि है जहां किसानों ने 84 प्रकार के टैक्स और बेगार के खिलाफ 44 साल तक संघर्ष किया था। विजय सिंह पथिक और माणिक्यलाल वर्मा जैसे दिग्गजों की इस कर्मभूमि का हाल आज बदतर हो चुका है।

स्थान लापरवाही का नमूना
बिजौलिया, शक्करगढ़ रोड सड़क के ठीक बीचों-बीच लगा दिया हाईमास्ट लाइट का पोल

नगर पालिका ने सड़क के बीच में खंभा लगाकर हादसों को न्योता दिया है। क्या अब इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए लोगों को फिर से आंदोलन करना पड़ेगा? यह प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है।

इनपुट सहयोग: इम्तियाज भाटी, महेश बोहरा, साजिद शेख, जितेंद्र सिंह नरुका और धीरेंद्र सिंह।

ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट्स के लिए हमसे जुड़े रहें। कल सुबह 7 बजे फिर होगी मुलाकात!


Exit mobile version