मध्य प्रदेश में UCC की तैयारी: आदिवासियों को बड़ी राहत, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। तीन खंडों में तैयार यह विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश की सामाजिक और जनजातीय संरचना को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसमें कई कड़े प्रावधानों का प्रस्ताव दिया गया है।
आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश
समिति ने अपनी रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण अनुशंसा यह की है कि मध्य प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों (ST) को समान नागरिक संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। समिति का मानना है कि प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक रीति-रिवाजों और आदिवासियों की विशिष्ट अनुष्ठानिक प्रथाओं का संरक्षण करना आवश्यक है, इसलिए उन्हें इस कानून के दायरे से मुक्त रखने की सिफारिश की गई है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर अब सख्त नियम
यूसीसी लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानून बेहद सख्त हो जाएंगे। समिति द्वारा तैयार ड्राफ्ट के अनुसार, अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित प्रमुख बातें शामिल हैं:
- अनिवार्य पंजीकरण: जोड़ों को अपना रजिस्ट्रेशन संबंधित रजिस्ट्रार के पास कराना होगा।
- माता-पिता और पुलिस को सूचना: रजिस्ट्रेशन के बाद इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से संबंधित युवक-युवती के माता-पिता और स्थानीय पुलिस को दी जाएगी।
- पहचान छिपाना होगा अपराध: यदि कोई व्यक्ति अपनी असली पहचान बदलकर या छिपाकर पंजीकरण कराता है, तो इसे एक गंभीर अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
तीन खंडों वाली विस्तृत रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
मुख्यमंत्री को सौंपी गई यह रिपोर्ट जेंडर इक्वालिटी और महिला सुरक्षा को केंद्र में रखकर बनाई गई है। इसका विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| खंड | विवरण |
|---|---|
| प्रथम खंड | इसमें 10 अध्याय हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय विधिक व्यवस्थाओं का विश्लेषण करते हैं। |
| द्वितीय खंड | इसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं, जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों को कवर करती हैं। |
| तृतीय खंड | इसमें जनता से प्राप्त 9.58 लाख सुझावों का समुदाय और लिंगवार विश्लेषण किया गया है। |
मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिपोर्ट सौंपने के लिए समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई व अन्य सदस्यों का आभार व्यक्त किया। सरकार ने रिपोर्ट मिलते ही इसे तत्काल विधि विभाग को समीक्षा के लिए भेज दिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, पूरी संभावना है कि मध्य प्रदेश सरकार इसी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में यूसीसी विधेयक को पेश कर सकती है।
