दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची, अवधेश नायक को नहीं मिली जगह
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी के महासचिव मुकुल वासनिक ने 13 जुलाई को चुनाव आयोग को स्टार प्रचारकों की आधिकारिक सूची सौंप दी है। इस सूची के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि इसमें दतिया से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे अवधेश नायक का नाम शामिल नहीं है।
वहीं, पार्टी ने दतिया के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती और सेंवढ़ा के पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा जैसे अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने तमाम दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है।
दिग्गज नेताओं का जमावड़ा
कांग्रेस द्वारा जारी की गई 40 स्टार प्रचारकों की सूची में पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरों को जगह दी गई है। इन नेताओं के जरिए पार्टी ग्वालियर-चंबल संभाग सहित पूरे प्रदेश में अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करेगी। सूची में शामिल प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- कमलनाथ: पूर्व मुख्यमंत्री
- दिग्विजय सिंह: पूर्व मुख्यमंत्री
- जीतू पटवारी: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
- उमंग सिंघार: नेता प्रतिपक्ष
- हरीश चौधरी: प्रदेश प्रभारी
यादव बंधु और पिता-पुत्र की जोड़ी पर दांव
इस बार की सूची में पारिवारिक तालमेल और क्षेत्रीय समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। स्टार प्रचारकों में यादव बंधुओं के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और कसरावद के विधायक सचिन यादव को शामिल किया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस ने अनुभवी नेता दिग्विजय सिंह और उनके बेटे व पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह की पिता-पुत्र की जोड़ी को भी प्रचार की कमान सौंपी है।
प्रमुख स्टार प्रचारकों का विवरण
| श्रेणी | प्रमुख नेता |
|---|---|
| वरिष्ठ नेतृत्व | कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, हरीश चौधरी |
| युवा व सांगठनिक चेहरे | जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, जयवर्धन सिंह |
| यादव बंधु | अरुण यादव, सचिन यादव |
गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव के लिए भाजपा भी पहले ही अपने स्टार प्रचारकों की सूची सार्वजनिक कर चुकी है। भाजपा की सूची में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिसके बाद कांग्रेस का यह कदम चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बनाता है। अब देखना होगा कि जनता का समर्थन किस दल की रणनीति को मिलता है।
