देश में महंगाई का बढ़ा बोझ: रिटेल इन्फ्लेशन लगातार छठे महीने ऊंचे स्तर पर, 4.38% पर पहुंची दर
देश में आम आदमी की जेब पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आलू, अदरक और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) में लगातार छठे महीने उछाल दर्ज किया गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार, 13 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38% के स्तर पर पहुंच गई है।
आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी में यह दर 2.74% थी, जो मई में बढ़कर 3.93% हो गई थी। खास बात यह है कि जनवरी 2025 के बाद यह पहला मौका है जब महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के संतोषजनक लक्ष्य (Mid-Target) को पार कर गई है।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाई चिंता
देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई तेजी के कारण ‘फूड इन्फ्लेशन’ में भी भारी इजाफा हुआ है। जून महीने में खाद्य महंगाई दर 5.32% दर्ज की गई, जो मई में 4.38% थी।
क्या ब्याज दरें बढ़ा सकता है RBI?
हालांकि मौजूदा महंगाई दर RBI के 2% से 6% के निर्धारित टॉलरेंस बैंड के भीतर है, लेकिन कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई का यह रुख जारी रहा, तो भविष्य में RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कठोर कदम उठा सकता है, जिसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर (Economic Growth) पर पड़ सकता है। इससे पहले जून में ही RBI ने अल नीनो के कारण कम मानसून और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था।
महंगाई के आंकड़ों को समझने का गणित
महंगाई दर के इस आंकड़े का सीधा मतलब आम जनता की खरीद क्षमता पर पड़ता है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| विवरण | प्रभाव |
|---|---|
| 4.38% महंगाई का अर्थ | जून 2025 की तुलना में जून 2026 में औसत खर्च में हुई बढ़ोतरी। |
| खरीद क्षमता | जो सामान जून 2025 में 100 रुपये में मिलता था, वह अब 104.38 रुपये का हो गया है। |
| प्रभावित कारक | इसमें सैकड़ों वस्तुओं की कीमतों का औसत निकाला जाता है, जिसमें कुछ के दाम घटे तो कुछ के बढ़े हैं। |
नए इंडेक्स और खर्च के पैटर्न में बदलाव
मौजूदा महंगाई के आंकड़ों की तुलना पिछले साल से करना संभव नहीं है, क्योंकि इस साल जनवरी में इंडेक्स को रीसेट किया गया है। अब 2024 को आधार वर्ष (Base Year) मानकर नई सीरीज लागू की गई है। नए इंडेक्स में 2023-24 के ‘हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे’ को आधार बनाया गया है। इसमें मुख्य वस्तुओं के वेटेज को 10% बढ़ाया गया है, जबकि उतार-चढ़ाव वाले खाद्य पदार्थों के वेटेज को कम कर दिया गया है, जिससे आंकड़ों की गणना के तरीके में बदलाव आया है।
सोना-चांदी हुआ सस्ता
महंगाई के आंकड़ों के बीच कीमती धातुओं के खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 13 जुलाई को चांदी की कीमतों में 3,155 रुपये की गिरावट आई है, जिससे यह 2.17 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। वहीं, 24 कैरेट सोना 1,079 रुपये सस्ता होकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले एक महीने में सोना और चांदी की कीमतों में क्रमशः 5,000 रुपये और 25,000 रुपये की कमी दर्ज की गई है।
