हरदा के स्कूल में बड़ा फर्जीवाड़ा: मार्कशीट में ‘फेल’ तो टीसी में ‘पास’, शिक्षा विभाग तक पहुंची शिकायत
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही और स्कूल प्रबंधन की संदिग्ध कार्यशैली का मामला सामने आया है। शहर के सनफ्लावर स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) में विरोधाभास ने अभिभावकों और शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। छात्रा को मार्कशीट में अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित किया गया है, जबकि उसे जारी की गई टीसी में उसे उत्तीर्ण (पास) दर्शाया गया है। इस गंभीर विसंगति को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित छात्रा पिछले नौ वर्षों से इसी शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत थी। नौवीं कक्षा की परीक्षा के परिणाम में उसे 500 में से मात्र 119 अंक प्राप्त हुए हैं। क्लास टीचर ने उसके शैक्षणिक प्रदर्शन को ‘पुअर’ (खराब) की श्रेणी में रखा है। हैरानी की बात यह है कि जहां मार्कशीट में उसे फेल दिखाया गया है, वहीं स्कूल द्वारा दी गई टीसी में उसे अगली कक्षा में प्रवेश के लिए ‘पास’ प्रमाणित किया गया है।
प्राचार्य का अजीब तर्क: ‘प्रिंटिंग मिस्टेक’ बताकर पल्ला झाड़ा
जब इस पूरे मामले पर स्कूल की प्राचार्या भुवनेश्वरी पांडे से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उन्होंने इसे महज एक ‘प्रिंटिंग मिस्टेक’ करार दिया। प्राचार्या का तर्क है कि यदि छात्रा फेल है, तो उसे मार्कशीट और टीसी दोनों में ही फेल होना चाहिए था। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टीसी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पर प्राचार्य के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, ऐसे में बिना जांचे-परखे हस्ताक्षर करना बड़ी प्रशासनिक चूक है।
- मामले की जांच: सूत्रों का दावा है कि स्कूल प्रबंधन अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहा है।
- प्रबंधन की प्रतिक्रिया: शाला विकास समिति के अध्यक्ष रविशंकर अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि संस्थान की साख से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्रा ने अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए शहर के एक अन्य निजी स्कूल में दाखिला ले लिया है। फिलहाल, शिक्षा विभाग की ओर से जांच के आदेश दिए जाने की उम्मीद है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह वास्तव में महज एक टाइपिंग की गलती है या फिर किसी बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है।










