बहराइच में गरजे सीएम योगी: विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- परिवारवाद के चलते पिछड़ा पूर्वी उत्तर प्रदेश
बहराइच: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच दौरे के दौरान विपक्ष पर जोरदार प्रहार किया। जिले में 352 करोड़ रुपये से अधिक की 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने कहा कि इन दलों की प्राथमिकता में कभी भी जनता का विकास नहीं रहा, बल्कि इनका मुख्य एजेंडा केवल एक परिवार और वंश को आगे बढ़ाना रहा है। यही कारण है कि बहराइच और पूरा पूर्वी उत्तर प्रदेश लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से कटा रहा।
मुख्यमंत्री ने 1857 की क्रांति के नायक महाराजा बलभद्र सिंह चहलारी और महाराजा सुहेलदेव के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए विपक्ष पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इन महापुरुषों को कभी सम्मान नहीं दिया। इसके विपरीत, पूर्ववर्ती सरकारों ने विदेशी आक्रांता सालार मसूद गाजी के नाम पर मेले आयोजित किए, जबकि महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में कोई पहल नहीं की गई।
विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन पर रोक
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नए भारत और आधुनिक उत्तर प्रदेश में किसी भी विदेशी आक्रांता के नाम पर स्मारक या मेलों का आयोजन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बहराइच की जनता की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों ने गाजी के नाम पर होने वाले आयोजनों को बंद कर एक साहसिक निर्णय लिया है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में भी इस तरह के किसी आयोजन को बढ़ावा न मिले।
- महाराजा सुहेलदेव के शौर्य को समर्पित भव्य स्मारक का निर्माण उसी स्थान पर किया गया है, जहां उन्होंने आक्रांताओं को धूल चटाई थी।
- मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया।
सपा सरकार की कार्यशैली पर तंज
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में विकास की गति इसलिए धीमी थी क्योंकि सत्ता की बागडोर उन लोगों के हाथ में थी, जिनकी दिनचर्या ही दोपहर में शुरू होती थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश का नेतृत्व करने वाले लोग परिवार के इशारों पर चलते थे। सीएम ने कहा, “सपा शासनकाल में पैसा तो था, लेकिन विकास की नियत नहीं थी। सारा धन सैफई खानदान की भेंट चढ़ जाता था।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में नौजवानों के सामने पहचान का संकट था, बेटियां असुरक्षित थीं और व्यापारी खौफ के साये में जीने को मजबूर थे। पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव होना एक आम बात बन गई थी, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और प्रदेश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है।
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