US का भारत समेत 60 देशों पर बड़ा प्रहार, 10% टैरिफ लगाने का ऐलान


अमेरिका ने शुक्रवार से ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम मुख्य रूप से 'फोर्स्ड लेबर' (जबरन मजदूरी) से जुड़ी चिंताओं के चलते उठाया गया है। यह नया स्थायी टैरिफ उस समय प्रभावी हुआ है जब…

अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10% अतिरिक्त टैरिफ, जानें भारतीय निर्यात पर इसका क्या असर होगा

अमेरिका ने शुक्रवार से ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम मुख्य रूप से ‘फोर्स्ड लेबर’ (जबरन मजदूरी) से जुड़ी चिंताओं के चलते उठाया गया है। यह नया स्थायी टैरिफ उस समय प्रभावी हुआ है जब ट्रम्प प्रशासन का 15% का अस्थायी ग्लोबल टैरिफ समाप्त हुआ है। अमेरिका ने कुल 60 देशों को इस दायरे में लिया है, जिसमें 17 देशों पर 10% और 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा और बांग्लादेश जैसे देश भी 10% वाले समूह में शामिल हैं।

भारतीय निर्यात के प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ेगा सीधा असर

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए इस नए टैरिफ के लागू होने से भारतीय निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कम हो सकती है। जिन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, उनमें शामिल हैं:

  • टेक्सटाइल और गारमेंट्स: परिधान उद्योग पर लागत का भारी दबाव बढ़ सकता है।
  • जेम्स एंड ज्वेलरी: रत्न और आभूषण क्षेत्र को भी इस अतिरिक्त शुल्क का सामना करना होगा।
  • कृषि और खाद्य उत्पाद: फूड प्रोडक्ट्स के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
  • इंजीनियरिंग और केमिकल: इन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों की अमेरिकी निर्भरता अधिक है।
  • लेदर उत्पाद: चमड़ा उद्योग के निर्यातकों के लिए मार्जिन कम होने की संभावना है।

भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ क्यों मिला?

शुरुआत में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन भारत सरकार द्वारा की गई कूटनीतिक बातचीत और नीतिगत सुधारों के बाद इसमें 2.5% की राहत दी गई। भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए, जिससे श्रमिक अधिकारों की निगरानी और सप्लाई चेन में पारदर्शिता आई है। हालांकि, 10% का टैरिफ अभी भी यह संकेत देता है कि अमेरिका भविष्य में भारत से श्रम मानकों के और भी कड़े अनुपालन की उम्मीद कर रहा है।

फोर्स्ड लेबर और सेक्शन 301: क्या है अमेरिका का रुख?

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, फोर्स्ड लेबर मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इसमें किसी व्यक्ति को हिंसा, धमकी या वेतन रोककर जबरन काम कराना शामिल है। अमेरिका की सख्ती का उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन से शोषण मुक्त करने के लिए बाध्य करना है।

वहीं, सेक्शन 301 अमेरिकी सरकार को यह अधिकार देता है कि यदि किसी देश की व्यापार नीति अमेरिकी उद्योगों के लिए अनुचित साबित होती है, तो वह उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सके। अमेरिका पहले भी चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और कॉटन जैसे उत्पादों पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई कर चुका है।


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