Guru Purnima 2026: आज गुरु पूर्णिमा पर करें ये 5 खास काम


आज आषाढ़ मास की पूर्णिमा है, जिसे देशभर में गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसे 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी समर्पित है। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की…

आज आषाढ़ मास की पूर्णिमा है, जिसे देशभर में गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी समर्पित है। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर आज रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी, जिसके चलते श्रद्धालु पूरे दिन अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे और धार्मिक अनुष्ठान कर सकेंगे।

गुरु का महत्व और पूजा

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्य अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यदि गुरु समीप हैं, तो उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें, और यदि वे दूर हैं, तो डिजिटल माध्यमों से उनका नमन करना भी पुण्यदायी माना जाता है।

आशीर्वाद पाने के लिए करें ये 5 कार्य

गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष अनुष्ठान और सेवाभाव जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोलते हैं। आप इन पांच उपायों को अपनाकर गुरु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं:

  • महर्षि वेदव्यास और विष्णु पूजा: आज के दिन भगवान विष्णु और महर्षि वेदव्यास की आराधना करें। पूजा में पीले पुष्प, तुलसी दल और फल अर्पित करें तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • ग्रंथों का पाठ: श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस या गुरु प्रदत्त मंत्रों का जाप करें। ज्ञान का अभ्यास करना ही गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा है।
  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पुस्तकें या छाता दान करें। पीले रंग की वस्तुओं का दान विशेष शुभ फलदायी माना गया है।
  • सेवा भाव: गौसेवा, पक्षियों को दाना-पानी देना और निर्धन विद्यार्थियों की सहायता करना गुरु की प्रसन्नता का मार्ग है।
  • आदर्शों का आत्मसात: पूजा के साथ-साथ गुरु द्वारा दी गई शिक्षाओं को जीवन में उतारने का संकल्प लें। सत्य, अनुशासन और विनम्रता को अपने आचरण में लाएं।

गुरु पूर्णिमा पर रखें इन बातों का ध्यान

पवित्र दिन की गरिमा बनाए रखने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:

  • गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान करने से बचें।
  • वाणी में मधुरता रखें और किसी के प्रति कटु वचनों का प्रयोग न करें।
  • अहंकार का त्याग करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • संभव हो तो किसी आश्रम या पवित्र मंदिर जाकर दर्शन अवश्य करें।

अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।


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