सीकर में छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोपी को 10 साल की कठोर कैद
सीकर के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण विशेष न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए लॉ के छात्र को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले आरोपी को 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश अशोक सैन ने आरोपी सुनील कुमार को दोषी करार देते हुए उस पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने इस मामले में मृतक छात्र द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट और मोबाइल में रिकॉर्ड की गई ऑडियो क्लिप को ठोस साक्ष्य मानते हुए यह फैसला सुनाया है।
क्या था पूरा मामला और धमकी का कारण?
मृतक पवन कुमार सीकर में रहकर एलएलबी (LLB) की पढ़ाई कर रहा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी सुनील कुमार, जो पेशे से एडवोकेट है, ने पवन को गैस पेपर के रुपयों के लेनदेन को लेकर लगातार प्रताड़ित किया। आरोपी ने पवन को जान से मारने की धमकियां दीं, जिससे वह मानसिक रूप से बुरी तरह टूट गया था। मृतक ने अपने सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से सुनील कुमार को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था।
- मानसिक प्रताड़ना: आरोपी ने पवन को धमकी दी थी कि यदि वह परीक्षा देने जाएगा, तो उसे जान से मार दिया जाएगा।
- महत्वपूर्ण साक्ष्य: पुलिस ने कोर्ट में 16 गवाह और 41 दस्तावेजी सबूत पेश किए, जिनमें मोबाइल की ऑडियो रिकॉर्डिंग सबसे अहम साबित हुई।
- घटना का खुलासा: पवन के परिजनों ने उद्योग नगर थाने में मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मृतक के किराए के मकान से शव बरामद किया।
न्यायिक प्रक्रिया और ठोस सबूतों की भूमिका
सहायक निदेशक अभियोजन रामलाल सैनी ने जानकारी दी कि पुलिस ने इस केस को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूती से पेश किया। मृतक ने अपने अंतिम समय में न केवल सुसाइड नोट लिखा, बल्कि आरोपी द्वारा दी जा रही धमकियों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी अपने फोन में सुरक्षित कर ली थी। इन डिजिटल साक्ष्यों ने कोर्ट में आरोपी के खिलाफ अपराध को सिद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने का जघन्य अपराध करते हैं।
