Guru Purnima: कोटपूतली में गुरुओं का सम्मान, सीएम ने दिया संदेश


गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विशेष अनुशंसा पर स्थानीय सीताराम बड़ा मंदिर ट्रस्ट परिसर में गुरु रामानंद दास महाराज को सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई सम्मान सामग्री, वस्त्र, मिठाई और शुभकामना संदेश…

कोटपूतली में गुरु पूर्णिमा पर विशेष आयोजन, मुख्यमंत्री के संदेश के साथ गुरुओं का सम्मान

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विशेष अनुशंसा पर स्थानीय सीताराम बड़ा मंदिर ट्रस्ट परिसर में गुरु रामानंद दास महाराज को सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई सम्मान सामग्री, वस्त्र, मिठाई और शुभकामना संदेश भेंट कर गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।

प्रशासनिक और जन प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में कोटपूतली विधायक हंसराज पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में प्रशासनिक और राजनीतिक जगत के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे, जिन्होंने गुरु के सानिध्य में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को साझा किया। उपस्थित प्रमुख लोगों में निम्नलिखित शामिल रहे:

  • हंसराज पटेल: विधायक, कोटपूतली (मुख्य अतिथि)
  • ओ.पी. साहरण: अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम)
  • योगेश देवल: उपजिला कलेक्टर (एसडीएम)
  • रामधन गुर्जर: तहसीलदार
  • महेंद्र सैनी: पूर्व चेयरमैन
  • अरुण सैनी: नगर भाजपा मंडल अध्यक्ष

समारोह की शुरुआत मंदिर समिति द्वारा अतिथियों के औपचारिक स्वागत के साथ हुई। इस दौरान उपजिला कलेक्टर योगेश देवल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया, जिसकी उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहना की।

मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान विधायक हंसराज पटेल और एडीएम ओ.पी. साहरण ने सीताराम बड़ा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने मंदिर परिसर के विकास और वहां आयोजित होने वाली धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु का सम्मान केवल आशीर्वाद पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे समृद्ध संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।


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