Farmer Suicide: जज ने डिस्कॉम अधिकारी से पूछा, कनेक्शन में देरी क्यों?


राजस्थान के बाड़मेर में कृषि बिजली कनेक्शन न मिलने से हताश होकर डिस्कॉम कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास करने वाले किसान के मामले का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश और डीएलएसए अध्यक्ष अजिताभ आचार्य ने बुधवार को डिस्कॉम के अधीक्षण…

बाड़मेर: कृषि कनेक्शन में देरी पर किसान के आत्मदाह के प्रयास का मामला, जिला जज ने डिस्कॉम दफ्तर पहुंच अधिकारियों को लगाई फटकार

राजस्थान के बाड़मेर में कृषि बिजली कनेक्शन न मिलने से हताश होकर डिस्कॉम कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास करने वाले किसान के मामले का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश और डीएलएसए अध्यक्ष अजिताभ आचार्य ने बुधवार को डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (SE) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया और अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई।

देरी का कारण स्पष्ट करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिला जज अजिताभ आचार्य ने डिस्कॉम एसई अशोक मीणा से कड़े लहजे में सवाल किया कि वर्ष 2017 से लंबित आवेदन का अब तक निपटारा क्यों नहीं हुआ? जज ने साफ तौर पर पूछा, “इस देरी का कारण क्या है? एक किसान को अपनी मांग पूरी करवाने के लिए आत्मदाह जैसे कदम उठाने पर मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?”

जिला जज ने डिस्कॉम प्रशासन को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि:

  • घटनाक्रम की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तत्काल प्रभाव से प्रस्तुत की जाए।
  • कार्यालय में वर्तमान में लंबित चल रहे सभी कृषि कनेक्शन आवेदनों का ब्यौरा तलब किया गया है।
  • अधिकारियों को उनकी सार्वजनिक जिम्मेदारी (पब्लिक ड्यूटी) का बोध कराते हुए कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश दिए गए।

क्या है पूरा मामला?

शिव उपखंड के अंतरा गांव निवासी किसान गोसाईराम ने वर्ष 2017 में कृषि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि सात साल बीत जाने के बाद भी विभाग ने कनेक्शन जारी नहीं किया, जिसके चलते किसान लंबे समय से सरकारी दफ्तर के चक्कर काट रहा था। इसी निराशा के चलते मंगलवार को किसान ने डिस्कॉम दफ्तर पहुंचकर खुद पर पेट्रोल उड़ेल लिया था, जिसे वहां मौजूद कर्मचारियों और पुलिस ने समय रहते काबू कर लिया था।

न्यायिक अधिकारी का कड़ा रुख

निरीक्षण के दौरान जब एसई अशोक मीणा ने जिला जज को अपनी कुर्सी ऑफर की, तो उन्होंने शालीनता से मना करते हुए कहा, “यह आपकी सीट है, आप अपना काम करें।” जिला जज ने स्पष्ट किया कि यद्यपि न्यायपालिका प्रशासन के दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन डीएलएसए अध्यक्ष के रूप में वे आमजन की समस्याओं और प्रशासनिक उदासीनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने दोहराया कि अधिकारी और न्यायपालिका दोनों ही जनता के सेवक हैं, और इस तरह की लापरवाही कतई स्वीकार्य नहीं है।


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