विदिशा में मानसून की जोरदार वापसी: फसलों को मिली नई संजीवनी, बेतवा नदी में बढ़ा जलस्तर
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में करीब दो सप्ताह के लंबे और चिंताजनक सूखे के बाद मानसून ने एक बार फिर अपनी सक्रियता दर्ज कराई है। सोमवार दोपहर से शुरू हुआ बारिश का दौर मंगलवार रात तक तेज हो गया, जो बुधवार सुबह तक रुक-रुक कर जारी रहा। इस मूसलाधार बारिश ने न केवल मुरझा रही खरीफ की फसलों को नई जान दी है, बल्कि जल संकट से जूझ रहे शहर के लिए भी राहत की बड़ी खबर दी है। बेतवा नदी में पानी की आवक बढ़ने से नगर की पेयजल व्यवस्था के सुधरने की प्रबल उम्मीद जगी है।
किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
पिछले दो सप्ताह से जिले में बारिश न होने के कारण स्थिति गंभीर हो चली थी। खेतों में नमी का स्तर लगातार गिर रहा था, जिससे धान और अन्य खरीफ फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया था। किसान काफी परेशान थे, लेकिन अब खेतों के लबालब भरने से कृषि कार्यों ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही क्रम बना रहा, तो इस वर्ष खरीफ का उत्पादन उम्मीद से बेहतर हो सकता है।
बेतवा नदी में लौटी रौनक और पेयजल संकट से राहत
भोपाल और रायसेन जिलों में हुई भारी वर्षा का सीधा असर विदिशा की जीवनदायिनी बेतवा नदी पर पड़ा है। लंबे समय से सूखी पड़ी नदी में पानी की आवक से जलस्तर में सुधार हुआ है। नदी के किनारे स्थित बाढ़ वाले गणेश मंदिर के पास के स्टॉप डैम से पानी की चादर बहने लगी है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोग उमड़ रहे हैं।
- नगर पालिका को पिछले दिनों हलाली बांध से पांच बार पानी खरीदना पड़ा था।
- नदी में पानी आने से अब जलापूर्ति व्यवस्था सुचारू होने की पूरी संभावना है।
- ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे तालाबों और जल स्रोतों में भी पानी भरने से भूजल स्तर सुधरेगा।
बारिश के आंकड़े: सामान्य से अभी भी पीछे
हालांकि वर्तमान बारिश ने फौरी राहत दी है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो विदिशा अभी भी औसत वर्षा के लक्ष्य से पीछे है। जिले में अब तक कुल 321.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 457.2 मिमी था। यानी वर्तमान में जिले में करीब 135.7 मिमी की कमी बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून के सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में यह अंतर कम हो जाएगा और जिले में जल संचय की स्थिति और बेहतर होगी।
