नरसिंहपुर में आपदा प्रबंधन का महाभियान: 500 ‘आपदा मित्र’ तैयार करने के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
नरसिंहपुर जिले में प्राकृतिक आपदाओं और मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष सात दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर का बुधवार से आगाज हुआ है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के निर्देशन में होमगार्ड एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में 500 कुशल स्वयंसेवकों की एक ऐसी फौज तैयार करना है, जो संकट के समय प्रशासन के साथ मिलकर ‘प्रथम प्रतिक्रिया दल’ (First Responder) के रूप में कार्य कर सके। प्रशिक्षण के पहले चरण में 160 स्वयंसेवकों को राहत और बचाव कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है।
राहत और बचाव कार्यों का मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण शिविर में स्वयंसेवकों को चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए तकनीकी और शारीरिक रूप से तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है:
- प्राथमिक उपचार (First Aid): घायल व्यक्तियों को तत्काल सहायता प्रदान करने के तरीके।
- आपदा तकनीक: बाढ़, भूकंप और आगजनी (Fire Fighting) जैसी स्थितियों में बचाव के सटीक कौशल।
- तैराकी और शारीरिक प्रशिक्षण: जलभराव और कठिन परिस्थितियों में बचाव कार्य।
- उपकरणों का संचालन: आधुनिक बचाव उपकरणों (Rescue Kits) का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग।
प्रशासन की प्राथमिकता: ‘आपदा मित्र’ बनेंगे संकट के सारथी
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कलेक्टर रजनी सिंह ने बताया कि राज्यव्यापी ‘आपदा मित्र’ योजना के तहत इन स्वयंसेवकों को तैयार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रशिक्षित ‘आपदा मित्र’ किसी भी अनहोनी की स्थिति में प्रशासन की पहली कड़ी होंगे, जो त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करेंगे। यह पहल स्थानीय स्तर पर आपदा के जोखिम को कम करने और जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
लक्ष्य और भविष्य की रूपरेखा
जिला होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य पूरे प्रदेश में लगभग 33 हजार स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है। इस बड़े लक्ष्य के अंतर्गत नरसिंहपुर जिले को 500 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का दायित्व सौंपा गया है। पहले चरण में शामिल 160 प्रतिभागियों को न केवल किट वितरित की गई है, बल्कि उन्हें आपदा प्रबंधन के मानकों के अनुरूप उच्च स्तरीय प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा का डटकर सामना कर सकें।
