बैतूल में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: छात्रों को 45 मिनट तक बारिश में करना पड़ा इंतजार
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के चिचोली विकासखंड स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल चूना हजूरी में प्रशासनिक लापरवाही का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। बुधवार सुबह 10 बजे स्कूल खुलने का निर्धारित समय था, लेकिन 45 मिनट बीत जाने के बाद भी स्कूल का मुख्य गेट नहीं खुला। भारी बारिश के बीच छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर खड़े होकर शिक्षकों का इंतजार करते रहे। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि कई छात्रों को मजबूरी में स्कूल का मुख्य गेट फांदकर अंदर प्रवेश करना पड़ा। यह घटना प्रदेश सरकार की ई-अटेंडेंस प्रणाली और सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था की जमीनी हकीकत को बयां करती है।
शिक्षकों की गैर-मौजूदगी और छात्रों का संघर्ष
स्कूल के गेट पर ताला लटके होने के कारण शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप रहीं। सुबह 10:45 बजे तक स्कूल में न तो कोई शिक्षक मौजूद था और न ही कोई कर्मचारी। बारिश के दौरान छात्र छाता लेकर बाहर खड़े रहने को मजबूर हुए। जब कुछ छात्र गेट फांदकर अंदर पहुंचे, तो पाया कि कक्षाओं के कमरों पर भी ताले लगे हुए थे, जिसके चलते उन्हें गलियारों में ही खड़ा रहना पड़ा। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से छात्रों की सुरक्षा और समयबद्धता को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन
जैसे ही स्कूल में देरी की खबर फैली, आक्रोशित अभिभावक और ग्रामीण बड़ी संख्या में स्कूल परिसर में पहुंच गए। ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली का कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षकों की मनमानी के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। बढ़ते विरोध और हंगामे के बाद स्कूल का भृत्य और अन्य स्टाफ मौके पर पहुंचा, जिसके बाद गेट खोला गया और पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
ई-अटेंडेंस और सरकारी दावों की पोल
इस घटना ने शिक्षा विभाग के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें ई-अटेंडेंस के जरिए स्कूलों में अनुशासन लाने की बात कही जाती है। ग्रामीणों ने विभाग से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- दोषी शिक्षकों पर तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- जिले के सरकारी स्कूलों में नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
- अधिकारियों को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मॉनिटरिंग के निर्देश दिए जाएं।
लगातार सामने आ रहे लापरवाही के मामले
चिचोली विकासखंड में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले खपरिया स्कूल में शिक्षक के शराब के नशे में स्कूल आने का मामला भी सुर्खियां बटोर चुका है। बार-बार मिल रही शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग की सुस्ती ने स्थानीय लोगों को प्रशासन के खिलाफ खड़ा कर दिया है। बैतूल कलेक्टर के शिक्षा सुधार के निर्देशों के बावजूद, जमीनी स्तर पर ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही का अभाव है। अब देखना यह होगा कि क्या विभाग इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों में दब जाएगा।
