सीधी में राशन वितरण में धांधली: ग्रामीणों ने किया जिला पंचायत का घेराव
मध्य प्रदेश के सीधी जिले की ग्राम पंचायत खैरा में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राशन वितरण में हो रही कथित धांधली से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने सरपंच सविता वर्मा की अगुवाई में जिला पंचायत कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी की गाड़ी को घेरकर रास्ता रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उनके हक का पूरा राशन नहीं मिल रहा है, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए।
राशन वितरण में मनमानी और ई-केवाईसी का खेल
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने कोटेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि राशन वितरण प्रणाली में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कोटेदार द्वारा ई-केवाईसी के नाम पर उनसे दो बार अंगूठा लगवा लिया जाता है, लेकिन बदले में उन्हें केवल एक महीने का ही राशन दिया जा रहा है, जबकि रिकॉर्ड में दो महीने का राशन दर्शाया जा रहा है। सरपंच सविता वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन एसडीएम और जनपद सीईओ कार्यालय से कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त था।
अधिकारियों ने दिया जांच का भरोसा
जिला पंचायत परिसर में करीब 10 मिनट तक स्थिति काफी गंभीर बनी रही, जहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग और महिलाएं सीईओ की गाड़ी के सामने अड़ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की गहन जांच कराई जाएगी।
- पारदर्शिता की मांग: ग्रामीणों ने राशन वितरण प्रक्रिया की पूरी तरह से जांच और कोटेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
- अधिकारियों की प्रतिक्रिया: सीईओ ने भरोसा दिलाया है कि यदि जांच में कोटेदार दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशासनिक लापरवाही: स्थानीय स्तर पर शिकायतों के अनसुना किए जाने के कारण ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक आने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सीधी प्रशासन ने अब इस पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करने के संकेत दिए हैं। यह घटना राशन वितरण प्रणाली में व्याप्त खामियों को उजागर करती है, जिससे गरीबों को मिलने वाले सरकारी अनाज में कटौती हो रही है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और कब तक दोषियों पर गाज गिरती है।
