Police Crisis: रीवा में स्टाफ की भारी कमी, पुलिस पर बढ़ा दबाव


रीवा शहर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सात प्रमुख थानों में पुलिस बल की भारी कमी सामने आई है। वर्तमान में कोतवाली, सिविल लाइन, चोरहटा, विश्वविद्यालय, समान, बिछिया और अमहिया जैसे महत्वपूर्ण थानों में कुल मिलाकर केवल 234 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं। शहर की बढ़ती आबादी और आपराधिक घटनाओं के ग्राफ को…

रीवा शहर की सुरक्षा पर संकट: 7 प्रमुख थानों में केवल 234 पुलिसकर्मी, बढ़ते अपराधों के बीच संसाधनों का टोटा

रीवा शहर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सात प्रमुख थानों में पुलिस बल की भारी कमी सामने आई है। वर्तमान में कोतवाली, सिविल लाइन, चोरहटा, विश्वविद्यालय, समान, बिछिया और अमहिया जैसे महत्वपूर्ण थानों में कुल मिलाकर केवल 234 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं। शहर की बढ़ती आबादी और आपराधिक घटनाओं के ग्राफ को देखते हुए, उपलब्ध पुलिस बल का यह आंकड़ा सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस को इन सीमित संसाधनों के साथ ही वीआईपी ड्यूटी, त्योहारों की सुरक्षा, धरना-प्रदर्शन और रोजमर्रा की गश्त जैसी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ रहा है।

थानों में बल का वितरण: सिविल लाइन सबसे आगे, अमहिया में सबसे कम

शहर के सात प्रमुख थानों में उपलब्ध पुलिस बल की स्थिति काफी असंतुलित है। आंकड़ों के अनुसार, थानों में तैनाती का विवरण इस प्रकार है:

  • सिविल लाइन थाना: 44 पुलिसकर्मी
  • कोतवाली थाना: 40 पुलिसकर्मी
  • चोरहटा और समान थाना: 36-36 पुलिसकर्मी
  • बिछिया थाना: 30 पुलिसकर्मी
  • विश्वविद्यालय थाना: 25 पुलिसकर्मी
  • अमहिया थाना: 23 पुलिसकर्मी

16 एसआई और 131 आरक्षकों के भरोसे शहर की सुरक्षा

पदवार स्थिति का विश्लेषण करें तो सात थानों की कमान केवल 6 थाना प्रभारियों के हाथों में है। पूरे सिस्टम को संचालित करने के लिए 16 उप निरीक्षक (एसआई), 18 सहायक उप निरीक्षक (एएसआई), 63 मुंशी और 131 आरक्षक तैनात हैं। जानकारों का मानना है कि इतनी कम संख्या में पुलिसकर्मियों के ऊपर शहर की सुरक्षा का भार होने से न केवल जांच प्रभावित होती है, बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बढ़ती आपराधिक चुनौतियां और विस्तार की आवश्यकता

रीवा शहर का तेजी से हो रहा विस्तार और अपराधों के बदलते स्वरूप ने पुलिस की जिम्मेदारियों को कई गुना बढ़ा दिया है। हाल के दिनों में सामने आई हत्या, लूट, चोरी और फायरिंग जैसी गंभीर घटनाओं ने पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं। सीमित स्टाफ होने के कारण एक ही पुलिसकर्मी को कई तरह की ड्यूटी निभानी पड़ती है, जिससे गश्त और विवेचना (जांच) के बीच तालमेल बिठाना कठिन हो रहा है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि शहर की सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए अब पुलिस बल की संख्या में पर्याप्त बढ़ोतरी करना अनिवार्य हो गया है। बढ़ती आबादी के अनुपात में पुलिस की मौजूदगी न केवल अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि आम जनता में सुरक्षा का भरोसा भी कायम रखेगी।


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