Nutrition: जिले के 45 हजार बच्चों में कुपोषण चिंता का विषय, पुख्ता इंतजाम जरूरी

इंदौर जिले में 45 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की मार झेल रहे हैं। हालिया पड़ताल में पोषण आहार वितरण व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। कई आंगनवाड़ी केंद्रों में जहां गंदगी के बीच भोजन पकाया जा रहा है, वहीं कई जगहों पर निर्धारित मेन्यू की अनदेखी की जा रही है। महिला एवं बाल…

इंदौर में 45 हजार बच्चों का भविष्य दांव पर: कुपोषण मिटाने के लिए एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ठोस उपाय

इंदौर जिले में 45 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की मार झेल रहे हैं। हालिया पड़ताल में पोषण आहार वितरण व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। कई आंगनवाड़ी केंद्रों में जहां गंदगी के बीच भोजन पकाया जा रहा है, वहीं कई जगहों पर निर्धारित मेन्यू की अनदेखी की जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के पूर्व कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव का मानना है कि यदि शासन और एजेंसियां मिलकर चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें, तो इस स्थिति को बदला जा सकता है।

कुपोषण दूर करने के लिए विशेषज्ञ के 4 सुझाव

  • सतत निगरानी और निरीक्षण: पोषण आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर कड़ी नजर रखना अनिवार्य है। भोजन बनने से लेकर थाली तक स्वच्छता बनी रहे, इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।
  • शुरुआती 5 साल पर फोकस: बच्चे के जीवन के पहले पांच वर्ष शारीरिक और मानसिक विकास के लिए निर्णायक होते हैं। इस दौरान बच्चों का नियमित वजन और लंबाई मापना जरूरी है ताकि कुपोषण के शुरुआती संकेतों को पकड़ा जा सके।
  • बजट की समीक्षा: वर्तमान में प्रति बच्चा केवल 8 रुपये का बजट मिलता है, जो बढ़ती महंगाई में पौष्टिक भोजन के लिए नाकाफी है। शासन को इस राशि की समीक्षा कर इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • मेन्यू चार्ट का कड़ाई से पालन: हर आंगनवाड़ी में साप्ताहिक मेन्यू का पालन अनिवार्य हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों को मिलने वाले भोजन में तय मानकों के अनुसार प्रोटीन और कैलोरी मौजूद हो।

प्रशासन की सख्ती: 12 सूत्रीय गाइडलाइन जारी

कुपोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने सभी परियोजना अधिकारियों के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य व्यवस्था में जवाबदेही तय करना है:

प्रमुख बिंदु विवरण
स्वच्छता मानक किचन शेड में वेंटिलेशन, हेड कैप का प्रयोग और बर्तनों की दैनिक सफाई अनिवार्य।
गुणवत्ता नियंत्रण वितरण से पहले कार्यकर्ता भोजन चखें, सैंपल सुरक्षित रखें और रजिस्टर में दर्ज करें।
निरीक्षण प्रक्रिया पर्यवेक्षक सप्ताह में 5 दिन निरीक्षण करेंगे और भोजन की फोटो व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजेंगे।
जवाबदेही खराब गुणवत्ता या मेन्यू का पालन न होने पर संबंधित समूह का भुगतान तुरंत रोका जाएगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि मातृ सहयोगिनी समितियों को भी प्रतिदिन भोजन चखकर रजिस्टर में हस्ताक्षर करने होंगे। इंदौर में कुपोषण के खिलाफ शुरू हुई यह नई मुहिम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक उम्मीद की किरण मानी जा रही है।


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