मालवा-निमाड़ का खिवनी अभयारण्य बना बाघों का नया ठिकाना, टाइगर रिजर्व बनाने की मांग तेज
मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में स्थित खिवनी अभयारण्य में बाघों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि ने इसे वन्यजीव संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। घने जंगल, प्रचुर जलस्रोत और मजबूत इकोसिस्टम के चलते वर्तमान में यहां लगभग 10 बाघ और उनके शावक मौजूद हैं। बाघों की बढ़ती आबादी और पारिस्थितिक महत्व को देखते हुए अब इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा देने की मांग जोर पकड़ रही है। वन विभाग ने अभयारण्य के विस्तार के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव भी शासन को भेजा है।
विस्तार की योजना और भविष्य की राह
खिवनी अभयारण्य वर्तमान में 134.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। बाघों के सुरक्षित विचरण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग ने लगभग 60 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त सामान्य वन क्षेत्र को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस विस्तार योजना में देवास जिले की कन्नौद, खातेगांव और पानीगांव रेंज के साथ सीहोर जिले की आष्टा और इछावर रेंज को जोड़ने की तैयारी है।
- इको-टूरिज्म का विकास: 2018 से यहां टेंट कैंप, कॉटेज और जंगल सफारी जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं।
- बढ़ता आकर्षण: पिछले साल अक्टूबर से जून तक यहां 12 हजार से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं।
- विविध वन्यजीव: बाघों के अलावा यहां तेंदुआ, भालू, भेड़िया, सांभर और चीतल जैसे वन्यजीव भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
रातापानी-ओंकारेश्वर कॉरिडोर की महत्वपूर्ण कड़ी
खिवनी अभयारण्य पश्चिमी मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण ‘रातापानी-खिवनी-ओंकारेश्वर’ (RKO) टाइगर कॉरिडोर का एक अभिन्न हिस्सा है। यह क्षेत्र रातापानी, ओंकारेश्वर, खंडवा और महाराष्ट्र के जंगलों के बीच बाघों के आवागमन का एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस कॉरिडोर की सुरक्षा मध्य प्रदेश की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
युवराज और मीरा से मिली वैश्विक पहचान
खिवनी को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाने में बाघ ‘युवराज’ और बाघिन ‘मीरा’ का विशेष योगदान रहा है। हालांकि, हाल ही में क्षेत्रीय संघर्ष के चलते बाघ युवराज को उपचार के लिए भोपाल के वन विहार भेजा गया, जिसके बाद से बाघ टी-3 ने इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया है।
टाइगर सोर्स पॉपुलेशन के रूप में विकसित करने का लक्ष्य
अभयारण्य के अधीक्षक विकास माहोरे के अनुसार, वन विभाग खिवनी को ‘सोर्स पॉपुलेशन एरिया’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके साथ ही वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की भी योजना है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास और तेज किए जाते हैं, तो विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि खिवनी भविष्य में मध्य प्रदेश के एक प्रमुख टाइगर रिजर्व के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराएगा।
