Khutar बकरी बाजार में अवैध वसूली: पंचायत ने टेंडर नकारे, जांच की मांग


सिंगरौली जिले के खुटार स्थित बकरी बाजार में अवैध निकासी शुल्क की वसूली का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जहां पशुपालकों और व्यापारियों से प्रति पशु 50 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ दबंग लोग पुलिस के नाम का डर दिखाकर मनमानी रकम वसूल…

सिंगरौली जिले के खुटार स्थित बकरी बाजार में अवैध निकासी शुल्क की वसूली का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जहां पशुपालकों और व्यापारियों से प्रति पशु 50 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ दबंग लोग पुलिस के नाम का डर दिखाकर मनमानी रकम वसूल रहे हैं, जबकि कुछ वाहन चालकों से तो एक बार में 800 से 1000 रुपये तक की अवैध मांग की गई है। इस घटना से स्थानीय व्यापार जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।

ग्राम पंचायत ने वसूली से किया किनारा

इस पूरे विवाद में तब एक बड़ा मोड़ आया जब खुटार ग्राम पंचायत की सरपंच सरिता देवी पनिका ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पंचायत की ओर से निकासी शुल्क के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को कोई टेंडर जारी नहीं किया गया है। सरपंच का यह बयान अवैध वसूली करने वालों के दावों की पोल खोलता है। सवाल यह उठता है कि यदि पंचायत का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है, तो बाजार के भीतर यह वसूली किस आधार पर और किसकी शह पर की जा रही है।

व्यापारियों और पशुपालकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

बाजार में आए ग्राहकों और पशुपालकों का कहना है कि इस तरह की जबरन वसूली से उनका मुनाफा पूरी तरह खत्म हो रहा है। जयप्रकाश सोनी जैसे स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की चुप्पी के कारण अवैध वसूली करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

  • आर्थिक शोषण: व्यापारियों को बिना किसी रसीद के अवैध वसूली का सामना करना पड़ रहा है।
  • पुलिस के नाम का दुरुपयोग: वसूली करने वाले लोग अक्सर पुलिस का नाम लेकर लोगों को डराने-धमकाने का काम करते हैं।
  • पारदर्शिता का अभाव: ग्राम पंचायत द्वारा टेंडर न होने के बावजूद बाजार में शुल्क का लिया जाना गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

अब स्थानीय नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन की ओर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि यह वसूली अवैध है, तो प्रशासन को तुरंत मौके पर पहुंचकर छापेमारी करनी चाहिए और इसमें शामिल दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। स्थानीय निवासियों का यह भी मानना है कि यदि समय रहते इस गिरोह पर लगाम नहीं कसी गई, तो भविष्य में खुटार बकरी बाजार की साख पर बुरा असर पड़ेगा और दूर-दराज से आने वाले पशुपालक बाजार से दूरी बना लेंगे।


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