Collectorate जनसुनवाई: न्याय के लिए फरियादियों का अनोखा प्रदर्शन, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

नीमच जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में उस समय हड़कंप मच गया जब अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों का सब्र का बांध टूट गया। कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त गहमागहमी का माहौल बन गया, जब न्याय की गुहार लगाने आई महिलाएं जमीन पर लोटकर रोती-बिलखती नजर आईं। प्रशासनिक अधिकारियों की…

नीमच जनसुनवाई: प्रशासनिक बेरुखी से भड़की जनता, कलेक्ट्रेट में दिखा दर्द और आक्रोश

नीमच जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में उस समय हड़कंप मच गया जब अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों का सब्र का बांध टूट गया। कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त गहमागहमी का माहौल बन गया, जब न्याय की गुहार लगाने आई महिलाएं जमीन पर लोटकर रोती-बिलखती नजर आईं। प्रशासनिक अधिकारियों की कथित लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता के कारण आम जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया।

न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर पीड़ित महिलाएं

जनसुनवाई में सामने आए मामले दिल दहला देने वाले थे। जावद तहसील के ग्राम लासूर धामनिया की एक विवाहिता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसके पति मुकेश बारेट ने पहली शादी छिपाकर उससे कोर्ट मैरिज की। अब पति उसे प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल चुका है, जिसके चलते वह मंदिर में रहने को मजबूर है। महिला ने आरोप लगाया कि सरवानिया पुलिस चौकी में उसकी एक न सुनी गई। वहीं, चीताखेड़ा की दिव्यांग बुजुर्ग महिला कला बाई गायरी ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि सरकारी ड्रोन सर्वे की गलती के कारण उनके पुश्तैनी मकान का नक्शा किसी और के नाम दर्ज हो गया है, जिसका फायदा उठाकर दबंग उनका निर्माण कार्य रुकवा रहे हैं।

जनसुनवाई में आए प्रमुख मामले: एक नजर में

क्षेत्र मुख्य समस्या
जावद/लासूर महिला के साथ धोखाधड़ी और पुलिस की निष्क्रियता।
चीताखेड़ा ड्रोन सर्वे में गड़बड़ी, दिव्यांग महिला के घर पर दबंगों का कब्जा।
मनासा (चुकनी) 2 करोड़ की सामाजिक जमीन पर अवैध कब्जा और आर्थिक अनियमितता।
ग्राम मोया विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और सीएम हेल्पलाइन पर गलत निराकरण।

भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

मनासा क्षेत्र से आए मामलों ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम चुकनी के पाटीदार समाज के 40 से अधिक लोगों ने आरोप लगाया कि समाज की करीब 2 करोड़ रुपये की कीमती जमीन पर कुछ लोग अवैध कब्जा कर निर्माण कर रहे हैं। समाज के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की गई, लेकिन उसका कोई हिसाब नहीं दिया गया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस का समझौता फार्मूला भी यहां पूरी तरह फेल साबित हुआ, क्योंकि समाज के 61 सदस्यों ने लिखित समझौते पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है।

सीएम हेल्पलाइन का ‘फॉल्स डिस्पोजल’ और ग्रामीणों पर दबाव

ग्राम मोया के ग्रामीणों ने विकास के दावों की पोल खोलते हुए बताया कि गांव में फैली गंदगी, कीचड़ और जर्जर सड़कों को लेकर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने बिना कोई काम किए ही कागजों पर शिकायतों का ‘फॉल्स डिस्पोजल’ (गलत निराकरण) कर दिया। अब सच को दबाने के लिए अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों और उनके परिवारों पर शिकायतें वापस लेने का मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई का आश्वासन

जनसुनवाई में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पीड़ितों की आपबीती सुनने के बाद संबंधित विभागों को मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार ने महिलाओं को न्याय का भरोसा दिलाया है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या कागजी कार्रवाई से परे इन पीड़ितों को वास्तव में न्याय मिल पाएगा या फिर यह जनसुनवाई भी महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी?


Exit mobile version