यूपी विधान परिषद का ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को समर्थन, विकास की राह में बताया मील का पत्थर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया है। परिषद ने इसे देश और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम करार दिया है। इस दौरान केंद्र सरकार के 129वें संविधान (संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 का स्वागत किया गया।
विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में लोकसभा, विधानसभा, निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जिससे सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। एक साथ चुनाव होने से हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और गरीबी उन्मूलन जैसे जनहित के कार्यों में निवेश किया जा सकेगा।
चुनावी ड्यूटी से मुक्त होंगी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
परिषद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बार-बार होने वाले चुनावों के कारण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ता है। विशेष रूप से शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने से स्कूलों में पठन-पाठन और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू होने से इन सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी और जनता को बिना किसी रुकावट के सुविधाएं मिल सकेंगी।
विकास कार्यों में नहीं आएगी बाधा
नीचे दी गई तालिका में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के संभावित लाभों को संक्षेप में समझा जा सकता है:
| लाभ का क्षेत्र | मुख्य प्रभाव |
|---|---|
| आर्थिक बचत | अलग-अलग चुनावों में होने वाले भारी खर्च में कटौती। |
| प्रशासनिक कार्यक्षमता | आदर्श आचार संहिता के बार-बार लागू होने से विकास कार्यों में बाधा नहीं आएगी। |
| जनसेवा | शिक्षक और स्वास्थ्य कर्मी अपनी मूल सेवाओं पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। |
| ई-गवर्नेंस | डिजिटल प्रशासन और विकास योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। |
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का स्वागत
विधान परिषद ने इस विधेयक की समीक्षा के लिए गठित 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का भी स्वागत किया है, जिसके अध्यक्ष पी.पी. चौधरी हैं। लखनऊ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, सांसद अनुराग ठाकुर, धर्मेंद्र यादव, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।
सदन का मानना है कि यह सुधार न केवल चुनावी खर्च को कम करेगा, बल्कि देश को एक स्थायी चुनावी चक्र प्रदान करेगा, जिससे जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय अपनी विकास परियोजनाओं को अधिक कुशलता से पूरा कर सकेंगे।
