Balaghat: 60 साल पुराना पीपल का पेड़ गिरा, घंटों जाम से लोग परेशान


मध्य प्रदेश के बालाघाट शहर में बुधवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बस स्टैंड के पास स्थित एक 60 साल पुराना विशाल पीपल का पेड़ अचानक धराशायी हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय सड़क पर भीड़ कम थी, जिसके चलते…

बालाघाट में भारी बारिश का कहर: 60 साल पुराना पीपल का पेड़ गिरा, घंटों तक बाधित रहा मुख्य मार्ग

मध्य प्रदेश के बालाघाट शहर में बुधवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बस स्टैंड के पास स्थित एक 60 साल पुराना विशाल पीपल का पेड़ अचानक धराशायी हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय सड़क पर भीड़ कम थी, जिसके चलते कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, पेड़ गिरने के कारण बुढ़ी मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे स्थानीय लोगों और स्कूली छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

नगर पालिका की सुस्ती और आम जनता की परेशानी

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घटना के तीन घंटे बाद तक भी नगर पालिका की टीम मौके पर नहीं पहुंची, जबकि यह स्थान नगर पालिका कार्यालय से केवल 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते राहगीरों और स्कूली बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर गिरे हुए पेड़ के नीचे से रास्ता पार करना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को भी पेड़ की टहनियों के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ा, जो किसी भी समय एक और बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती और बिजली विभाग की कार्रवाई

घटना के चश्मदीद नितिन ने बताया कि पेड़ के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें कुछ पलों के लिए लगा कि भूकंप आ गया है। वे बाल-बाल अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। वहीं, पूर्व पार्षद अनिल सोनी ने नगर पालिका के लचर रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। स्थिति को देखते हुए विद्युत विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एहतियात के तौर पर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को बंद कर दिया ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

सुरक्षा के प्रति बरतें सावधानी

  • भारी बारिश के दौरान पुराने पेड़ों और जर्जर इमारतों के पास खड़े होने से बचें।
  • यदि कहीं पेड़ गिरने या बिजली के तार टूटने की सूचना मिले, तो तुरंत संबंधित नगर निगम या हेल्पलाइन को सूचित करें।
  • स्कूल जाने वाले बच्चों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के लिए जागरूक करें।
  • प्रशासन को ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर समय रहते छंटाई (Trimming) करानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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