Fraud: लाख्या पंचायत में 60 लाख का फर्जीवाड़ा, सरपंच-सचिव पर ग्रामीणों का गंभीर आरोप

राजगढ़ जिले की खुजनेर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लाख्या में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। सोमवार को बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और सरपंच बीरम सिंह चौहान व पंचायत सचिव के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2023 से अब…

राजगढ़ में पंचायत घोटालों का बड़ा खुलासा: 60 लाख के गबन का आरोप

राजगढ़ जिले की खुजनेर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लाख्या में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। सोमवार को बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और सरपंच बीरम सिंह चौहान व पंचायत सचिव के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2023 से अब तक पांचवें वित्त आयोग की करीब 50 से 60 लाख रुपये की राशि बिना कोई काम कराए फर्जी बिलों के जरिए डकार ली गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में खुलासा किया कि पंचायत में बिना किसी वर्क कोड को जेनरेट किए और धरातल पर एक ईंट भी रखे बिना केवल 15 दिनों के भीतर 28 लाख रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। शिकायत के अनुसार, एक ही बिल को बार-बार स्कैन करके भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि जमीनी हकीकत में वे कार्य कहीं भी मौजूद नहीं हैं।

अजीबोगरीब खर्चों की लंबी फेहरिस्त

शिकायत में पंचायत द्वारा दिखाए गए खर्चों का ब्योरा चौंकाने वाला है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकारी खजाने का दुरुपयोग निजी सुख-सुविधाओं और मनमाने बिलों के जरिए किया गया है। आवेदन में निम्नलिखित संदिग्ध खर्चों का उल्लेख किया गया है:

  • फोटोकॉपी के नाम पर 2 लाख रुपये का भुगतान।
  • मिठाई और नाश्ते के बिलों में 78 हजार रुपये की हेराफेरी।
  • लैपटॉप और मोबाइल खरीदने के नाम पर 2 लाख रुपये खर्च।
  • जेसीबी टायर, पानी की मोटर और जमीन लीज के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान।
  • पुरानी पुलिया को नया बताकर सरकारी धन का गबन।

घटिया निर्माण और सरकारी संपत्ति का गायब होना

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि नए पंचायत भवन के निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और सरकारी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। इसके अलावा, पुराने पंचायत भवन का कीमती सामान, जैसे- फर्नीचर, पंखे, टीवी, सोलर प्लेट और गोदरेज अलमारी का कोई अता-पता नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सारा सामान सरपंच और सचिव की मिलीभगत से खुर्द-बुर्द कर दिया गया है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीण हिंदू सिंह और दुर्गेश पटेल ने स्पष्ट कहा कि कागजों में विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन गांव में कहीं भी काम नजर नहीं आता। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए सरकारी राशि की वसूली की जाए। फिलहाल, इस मामले में सरपंच और सचिव का पक्ष नहीं मिल सका है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।


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