रायपुर सेंट्रल जेल: महिला बंदियों को मिल रही आत्मनिर्भरता की नई राह
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय जेल में महिला बंदियों के भविष्य को संवारने के लिए एक सराहनीय पहल की गई है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित ‘निश्चय कार्यक्रम’ के माध्यम से यहां महिला बंदियों को न केवल हुनरमंद बनाया जा रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत महिला बंदियों को अचार और मसाला बनाने का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे जेल की चारदीवारी से बाहर निकलने के बाद समाज में सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।
अचार और मसाला निर्माण का मिला विशेष प्रशिक्षण
प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इन महिला बंदियों ने जेल परिसर में ही उत्पादन कार्य शुरू कर दिया है। वर्तमान में आम, नींबू, गाजर और लहसुन समेत कई तरह के स्वादिष्ट अचार तैयार किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन ने इस प्रशिक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की थी, जिसमें निम्नलिखित मुख्य पहलुओं पर ध्यान दिया गया है:
- कुल महिला बंदी: 60 बंदियों को दिया गया विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण।
- तकनीकी ज्ञान: खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण का प्रशिक्षण।
- पैकेजिंग कौशल: उत्पादों को बाजार में बेचने योग्य बनाने के लिए आधुनिक पैकेजिंग की जानकारी।
बिक्री से होने वाली आय का लाभ सीधे बंदियों को
महिला बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। इन उत्पादों को केंद्रीय जेल परिसर में स्थित ‘आस्था गृह उद्योग स्टॉल’ (आस्था मुंगोड़ी सेंटर) और जेल कैंटीन के माध्यम से बेचा जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन उत्पादों की बिक्री से जो भी मुनाफा होगा, उसका एक निश्चित हिस्सा सीधे संबंधित महिला बंदियों के बैंक खातों में जमा किया जाएगा।
| योजना का नाम | उद्देश्य | बिक्री केंद्र |
|---|---|---|
| निश्चय कार्यक्रम | आर्थिक आत्मनिर्भरता और कौशल विकास | आस्था गृह उद्योग स्टॉल व जेल कैंटीन |
जेल प्रशासन का विजन: रिहाई के बाद भी मिले सम्मानजनक रोजगार
जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने इस पहल पर जानकारी देते हुए कहा कि ‘निश्चय कार्यक्रम’ का मुख्य लक्ष्य केवल बंदियों को व्यस्त रखना नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसा कौशल प्रदान करना है जो उनके भविष्य में काम आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल से रिहाई के बाद ये महिलाएं अपने बनाए गए अचार और मसालों के छोटे उद्योग के जरिए स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि महिला बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सके।
