राजिम में भू-माफियाओं का आतंक: सरकारी तालाब और नहरों को पाटकर अवैध प्लाटिंग का खेल
छत्तीसगढ़ के राजिम में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब उन्होंने सरकारी संपत्तियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में क्षेत्र में सरकारी नहरों और सार्वजनिक तालाबों को पाटकर धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन पर भी इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं, जिसके बाद अब प्रशासनिक अमला हरकत में आया है।
कलेक्टर से की गई थी शिकायत, सबूतों के साथ पेश किए गए साक्ष्य
बरोंडा निवासी नेतराम धृतलहरे ने इस अवैध कब्जे के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 2 जुलाई को कलेक्टर भगवान सिंह उइके को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि प्रभावशाली लोगों की शह पर भारी मशीनों का उपयोग करके सार्वजनिक तालाबों को पाटा जा रहा है। नेतराम ने इस पूरी घटना का वीडियो सबूत भी प्रशासन को सौंपा है, जिसमें साफ तौर पर अवैध रूप से जमीन को समतल करते हुए देखा जा सकता है।
- खसरा नंबर 584: डेढ़ एकड़ में फैले निस्तारी तालाब को पूरी तरह पाट दिया गया।
- अवैध प्लाटिंग का जाल: तालाब से सटी कृषि भूमि को खरीदकर उसे आवासीय भूखंडों में बदला जा रहा है।
- प्रशासनिक चुप्पी: जून के अंतिम दिनों में शिकायत करने के बावजूद तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एसडीएम ने दी कार्रवाई की चेतावनी, 100 से अधिक रकबे पर प्रतिबंध
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राजिम के एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिक्रिया दी है। प्रशासन ने फिलहाल 100 से अधिक रकबे पर किसी भी प्रकार की खरीदी-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में भू-माफियाओं की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| शिकायतकर्ता | नेतराम धृतलहरे (बरोंडा) |
| प्रभावित क्षेत्र | चौबे बांधा मार्ग और आसपास की सरकारी जमीन |
| प्रशासनिक कदम | 100 से अधिक रकबे की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध |
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की शुरुआती सुस्ती के कारण अब माफियाओं ने दानी तालाब को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यदि समय रहते इन अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में क्षेत्र का जल स्तर गिरने और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन की ओर से की जाने वाली यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या भू-माफियाओं पर नकेल कसती है।
