Archery: शिवबती ने संभागीय प्रतियोगिता जीती, राज्य स्तर के लिए क्वालीफाई किया

छत्तीसगढ़ की बेटी शिवबती ने तमाम विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए खेल के मैदान में एक नई इबारत लिखी है। श्रवण दिव्यांग होने के बावजूद शिवबती ने संभाग स्तरीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर अपने हुनर का लोहा मनवाया है। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के…

संघर्षों को मात देकर तीरंदाजी में चमकी शिवबती, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई

छत्तीसगढ़ की बेटी शिवबती ने तमाम विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए खेल के मैदान में एक नई इबारत लिखी है। श्रवण दिव्यांग होने के बावजूद शिवबती ने संभाग स्तरीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर अपने हुनर का लोहा मनवाया है। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है।

अभावों भरा बचपन और कठिन सफर

शिवबती का जीवन शुरुआत से ही चुनौतियों से भरा रहा। बीमारी के चलते उन्होंने अपनी मां को खो दिया, वहीं कुछ समय बाद नक्सली हिंसा ने उनके सिर से पिता का साया भी छीन लिया। अनाथ होने के बाद उनके चाचा ने उन्हें कोण्डागांव स्थित बालिकागृह में सुरक्षित आश्रय दिलाया। यहाँ उन्हें न केवल शिक्षा मिली, बल्कि खेल के प्रति उनके रुझान को भी पहचाना गया।

आईटीबीपी के प्रशिक्षकों ने संवारा हुनर

बालिकागृह में मिलने वाले सुरक्षित वातावरण ने शिवबती को अपने सपनों को उड़ान देने का मौका दिया। उनकी प्रतिभा को देख भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के प्रशिक्षकों ने उन्हें विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन बिलासपुर स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुआ, जहां उन्होंने एक साल तक उच्च स्तरीय कोचिंग प्राप्त की।

उपलब्धियों की एक झलक

विवरण उपलब्धि
प्रतियोगिता संभाग स्तरीय शालेय तीरंदाजी
स्थान जगदलपुर
परिणाम प्रथम स्थान (स्वर्ण पदक)
अगला पड़ाव राज्य स्तरीय प्रतियोगिता

संसाधनों और मेहनत का मिला संगम

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल कोष निधि के माध्यम से बालिकागृह की छात्राओं के लिए इंडियन और रिकर्व तीरंदाजी के आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए। इन संसाधनों और प्रशिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन ने शिवबती की तकनीक में निखार ला दिया।

  • दृढ़ संकल्प: व्यक्तिगत दुखों को भुलाकर खेल पर पूरा फोकस।
  • विशेष प्रशिक्षण: आईटीबीपी के एक्सपर्ट्स द्वारा नियमित अभ्यास।
  • समर्थन: जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग का पूरा सहयोग।

आज शिवबती की इस सफलता पर पूरा विभाग और बालिकागृह परिवार गौरवान्वित है। उनकी यह उपलब्धि न केवल अन्य दिव्यांग बालिकाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अब सभी की निगाहें उनकी आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता पर टिकी हैं।


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