बालदा ग्राम पंचायत में सरकारी लापरवाही: बिना मरम्मत ही बंद कर दी गई हैंडपंप सुधार की शिकायत
राजस्थान के बालदा ग्राम पंचायत की मोटाल बस्ती में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ दो खराब हैंडपंपों की मरम्मत के बिना ही राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 पर दर्ज शिकायत को ‘समाधान’ बताकर बंद कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि न तो मौके पर कोई मरम्मत कार्य हुआ और न ही किसी अधिकारी ने स्थल का निरीक्षण किया। इस फर्जी निस्तारण से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
11 जुलाई को दर्ज हुई थी शिकायत
पूरे मामले की जानकारी देते हुए मोटाल बस्ती के वार्ड पंच मोईन खान ने बताया कि उन्होंने 11 जुलाई 2026 को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर क्षेत्र के दो खराब हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें पेयजल की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन 20 जुलाई 2026 को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के सहायक अभियंता अशोक कुमार मीणा ने पोर्टल पर शिकायत का स्टेटस ‘समाधान’ दर्शाते हुए उसे बंद कर दिया।
मौके पर निरीक्षण के बाद खुला फर्जीवाड़े का सच
शिकायतकर्ता मोईन खान ने बताया कि जब पोर्टल पर शिकायत बंद होने का नोटिफिकेशन मिला, तो उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर स्थिति की जांच की। वहां पहुंचकर उन्होंने पाया कि दोनों हैंडपंप अभी भी पूरी तरह से खराब पड़े हैं और उनसे पानी की एक बूंद भी नहीं निकल रही है। मोईन खान ने आरोप लगाया कि विभाग ने बिना किसी जमीनी हकीकत को जाने और बिना मरम्मत किए ही कागजों में समस्या का समाधान कर दिया, जो सीधे तौर पर आमजन को गुमराह करने जैसा है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
- पारदर्शिता का अभाव: बिना काम किए शिकायत बंद करना सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
- पेयजल संकट बरकरार: हैंडपंप खराब होने के कारण मोटाल बस्ती के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
- कागजी खानापूर्ति: जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस है, जबकि फाइलों में सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और PHED के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की गई और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।










