भिलाई सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण पर टी.एस. सिंहदेव का तीखा हमला
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने दुर्ग में पत्रकारों से चर्चा करते हुए भिलाई के सेक्टर-9 स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र के प्रस्तावित निजीकरण का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने राज्य सरकार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाते हुए इसे जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया। सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की जनविरोधी नीतियों को दर्शाता है।
सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के उद्देश्य पर प्रहार
सिंहदेव ने याद दिलाया कि सेक्टर-9 अस्पताल की नींव आम जनता को निशुल्क और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के नेक इरादे से रखी गई थी। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की जनकल्याणकारी सोच के विपरीत जाकर इस संस्थान का निजीकरण करना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी संसाधनों, इमारतों और मशीनों का उपयोग हो रहा है, तो मुनाफा निजी हाथों में क्यों जाना चाहिए?
निजीकरण के दुष्प्रभावों को लेकर सिंहदेव ने निम्नलिखित चिंताएं व्यक्त कीं:
- इलाज का खर्च: निजी हाथों में कमान जाने से गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इलाज का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
- यूनिवर्सल हेल्थ केयर का उल्लंघन: यूनिवर्सल हेल्थ केयर का मूल सिद्धांत है कि मरीज को दवा, जांच और भर्ती के लिए जेब से खर्च न करना पड़े, जिसे सरकार अनदेखा कर रही है।
- जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना: सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में सौंपना इस बात का संकेत है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाएं चलाने में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है।
पीसीसी अध्यक्ष पद की दौड़ पर पूर्ण विराम
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चल रही चर्चाओं और अटकलों पर विराम लगाते हुए टी.एस. सिंहदेव ने साफ कर दिया कि वह किसी भी दौड़ में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कांग्रेस हाईकमान का पूरा ध्यान उन राज्यों पर केंद्रित है, जहां 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| वर्तमान प्राथमिकता | उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्य। |
| छत्तीसगढ़ संगठन | फिलहाल दिल्ली में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं। |
| सिंहदेव का रुख | किसी भी पद की दौड़ से इनकार, पार्टी के निर्देश सर्वोपरि। |
सिंहदेव ने स्वीकार किया कि छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक स्तर पर फैसलों में अधिक देरी नहीं होनी चाहिए, लेकिन अभी तक इस विषय पर केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर कोई औपचारिक मंथन शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस समय पूरी तरह से चुनावी राज्यों की रणनीति को मजबूत करने में जुटी है।










