Cheque बाउंस के 100 मामले एक दिन में निपटे, 75 लाख का समझौता।

ग्वालियर के उन लोगों के लिए शनिवार का दिन बेहद राहत लेकर आया जो लंबे समय से चेक बाउंस (धारा-138 एनआई एक्ट) के कानूनी पचड़ों में फंसे हुए थे। जिला न्यायालय में आयोजित विशेष लोक अदालत में आपसी सहमति और समझौते के जरिए कुल 100 लंबित मामलों का एक ही दिन में सफल निराकरण कर…

ग्वालियर में विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस के 100 मामलों का हुआ निपटारा

ग्वालियर के उन लोगों के लिए शनिवार का दिन बेहद राहत लेकर आया जो लंबे समय से चेक बाउंस (धारा-138 एनआई एक्ट) के कानूनी पचड़ों में फंसे हुए थे। जिला न्यायालय में आयोजित विशेष लोक अदालत में आपसी सहमति और समझौते के जरिए कुल 100 लंबित मामलों का एक ही दिन में सफल निराकरण कर दिया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच 75 लाख 7 हजार रुपए से अधिक का अवॉर्ड पारित किया गया, जो कानूनी विवादों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी मिली बड़ी सफलता

विशेष लोक अदालत का दायरा केवल लंबित मुकदमों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि कोर्ट पहुंचने से पहले के विवादों को भी सुलझाने में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली। आंकड़ों के अनुसार, कुल 29 प्री-लिटिगेशन मामलों में भी दोनों पक्षों ने आपसी सुलह की राह चुनी, जिसमें 9 लाख 50 हजार रुपए का अवॉर्ड पारित हुआ। इस पहल ने साबित कर दिया कि लोक अदालतें विवादों के त्वरित समाधान के लिए सबसे सशक्त माध्यम हैं।

ग्वालियर, डबरा और भितरवार में विशेष आयोजन

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, यह विशेष लोक अदालत ग्वालियर जिला मुख्यालय के साथ-साथ डबरा और भितरवार के सिविल न्यायालयों में भी आयोजित की गई। इस पूरे आयोजन का संचालन प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ललित किशोर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

सुनवाई के लिए बनीं 9 विशेष खंडपीठ

न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए जिला न्यायालय में व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला न्यायाधीश प्रदीप दुबे द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मामलों के प्रभावी और तेज निपटारे के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित व्यवस्थाएं की थीं:

  • कुल 9 विशेष खंडपीठों का गठन किया गया था ताकि कोई भी मामला लंबित न रहे।
  • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पुष्पेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
  • अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने और पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति दिलाने पर मुख्य जोर दिया गया।

इस विशेष लोक अदालत के माध्यम से न केवल अदालतों का कार्यभार कम हुआ, बल्कि वर्षों से चले आ रहे विवादों का अंत होने से पक्षकारों ने भी राहत की सांस ली है।