Private स्कूलों की मांग: सरकार दखल बंद करे और RTE का बकाया भुगतान करे

जालोर में निजी स्कूल संचालकों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिला निजी विद्यालय संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में स्कूल संचालक जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संचालकों का आरोप है कि 'राज संबल' और 'शिक्षा संबल' जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्कूलों में…

जालोर: निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, सरकार के ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम पर उठाए सवाल

जालोर में निजी स्कूल संचालकों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिला निजी विद्यालय संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में स्कूल संचालक जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संचालकों का आरोप है कि ‘राज संबल’ और ‘शिक्षा संबल’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्कूलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप लगातार बढ़ाया जा रहा है, जो शिक्षण कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप से शिक्षा व्यवस्था पर असर

संघ के प्रतिनिधि किशोर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि निजी स्कूल राज्य की शिक्षा प्रणाली की रीढ़ हैं, लेकिन वर्तमान में उन पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा संबल कार्यक्रम के नाम पर स्कूलों का बार-बार निरीक्षण किया जा रहा है और जटिल रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं थोपी जा रही हैं। इससे स्कूलों का शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। संचालकों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अपनी प्रबंधकीय स्वायत्तता बनाए रखने का पूरा अधिकार है।

निजी स्कूल संचालकों की प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से संघ ने सरकार के सामने अपनी निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • RTE बकाया भुगतान: राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  • हस्तक्षेप पर रोक: स्कूलों में चल रहे अनावश्यक निरीक्षण और प्रशासनिक दबाव को तुरंत बंद किया जाए।
  • स्वायत्तता की सुरक्षा: राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थाएं अधिनियम, 1993 की मूल भावना के अनुरूप स्कूलों को कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाए।

आंदोलन की चेतावनी

निजी स्कूल संघ ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

मुद्दासंघ की मांग
प्रशासनिक दबावनिरीक्षण और रिपोर्टिंग का बोझ कम हो।
वित्तीय बकायाRTE प्रतिपूर्ति राशि का तुरंत भुगतान हो।
स्वायत्तताशैक्षणिक संस्थाओं को कानूनी अधिकार के तहत काम करने दें।

फिलहाल, जालोर के निजी स्कूल संचालकों का यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।