Missing लड़कियों पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस की सुस्ती पर लगाई फटकार

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य में लापता लड़कियों और गुमशुदा लोगों की बरामदगी को लेकर पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिस विभाग इन संवेदनशील मामलों को बेहद हल्के में ले रहा है। जांच का जिम्मा ऐसे अधिकारियों को…

लापता बेटियों की तलाश में पुलिस की लापरवाही पर भड़का हाईकोर्ट, भिंड एसपी को दिए कड़े निर्देश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य में लापता लड़कियों और गुमशुदा लोगों की बरामदगी को लेकर पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिस विभाग इन संवेदनशील मामलों को बेहद हल्के में ले रहा है। जांच का जिम्मा ऐसे अधिकारियों को सौंपा जा रहा है, जिन्हें आधुनिक तफ्तीश के बुनियादी तौर-तरीकों की भी समझ नहीं है। यह टिप्पणी भिंड जिले के आलमपुर थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने की।

सोशल मीडिया तक सिमटी पुलिस की जांच

मामले की सुनवाई के दौरान जब आलमपुर थाने के एएसआई ओंकार सिंह तोमर केस डायरी लेकर अदालत में पेश हुए, तो उनकी कार्यशैली की पोल खुल गई। कोर्ट ने जब उनसे लापता लड़की की तलाश में किए गए प्रयासों के बारे में पूछा, तो एएसआई का जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। उन्होंने कहा, “मैंने लड़की का इंस्टाग्राम और फेसबुक खंगाला है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।”

इस जवाब पर कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या पुलिस की पूरी जांच अब सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक ही सीमित रह गई है? कोर्ट ने कहा कि विवेचना अधिकारी जांच करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं और उनके पास तफ्तीश का कोई ठोस आधार नहीं है।

न्यायालय के कड़े निर्देश और कार्रवाई

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • जांच अधिकारी पर कार्रवाई: कोर्ट ने भिंड एसपी को आदेश दिया है कि वर्तमान जांच अधिकारी (एएसआई) को 24 घंटे के भीतर मामले से हटाया जाए।
  • वरिष्ठ अधिकारी को कमान: मामले की जांच अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाएगी।
  • एसपी से जवाब तलब: भिंड पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

भिंड एसपी से इन 3 बिंदुओं पर मांगा गया जवाब

हाईकोर्ट ने केवल निचले स्तर के अधिकारी को ही नहीं, बल्कि जिले के पुलिस कप्तान को भी आड़े हाथों लिया है। अदालत का मानना है कि एसपी ने बिना जांच अधिकारियों की सक्षमता परखे उन्हें मामले सौंपे, जो घोर लापरवाही है। कोर्ट ने एसपी से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:

क्रम संख्यापूछे गए सवाल
1जांच अधिकारी की नियुक्ति के समय उनकी योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया?
2लापता लड़की की बरामदगी के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
3भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

यह मामला पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है, क्योंकि न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि गुमशुदगी जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में कितना सुधार लाता है।