Udaipur: मोडिफाई स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई, 3 सीज और 9 का चालान

राजस्थान के उदयपुर में अवैध रूप से संचालित और अनधिकृत रूप से मॉडिफाई की गई लक्जरी बसों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। शहर के खेलगांव चौराहा पर परिवहन विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा…

उदयपुर में परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन: नियमों को ताक पर चलाने वाली 3 स्लीपर बसें सीज, लगा भारी जुर्माना

राजस्थान के उदयपुर में अवैध रूप से संचालित और अनधिकृत रूप से मॉडिफाई की गई लक्जरी बसों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। शहर के खेलगांव चौराहा पर परिवहन विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों पर लगाम कसना है।

अभियान का उद्देश्य और निर्देश

यह कार्रवाई जिला एवं सेशन न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उदयपुर के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के विशेष निर्देशों के बाद अमल में लाई गई। अभियान का मुख्य लक्ष्य नागरिकों के ‘सुरक्षित परिवहन’ के अधिकार की रक्षा करना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और परिवहन विभाग की टीम ने सुखेर थाना क्षेत्र के खेलगांव चौराहा पर नाकाबंदी कर बसों की सघन जांच की।

कार्रवाई का विवरण: एक नजर में

संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीम ने कुल 20 बसों की जांच की। जांच के दौरान कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अनधिकृत बदलाव पाए गए। इस कार्रवाई के मुख्य आंकड़े नीचे दिए गए हैं:

विवरणसंख्या/राशि
कुल जांच की गई बसें20
सीज की गई बसें03
जुर्माना लगाई गई बसें09
कुल वसूला गया जुर्माना1 लाख 20 हजार रुपये

इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस बड़े अभियान को सफल बनाने में प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही। कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित अधिकारी मौके पर मौजूद रहे:

  • राहुल चौधरी, अपर जिला न्यायाधीश
  • मनीष कुमार जोशी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
  • मुकेश डाड, जिला परिवहन अधिकारी
  • राजेंद्र दन्तसुलिया, तेजपाल और घनश्याम मीणा, आरटीओ इंस्पेक्टर

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी अनधिकृत रूप से मॉडिफाई की गई बसों और बिना परमिट के संचालित वाहनों के खिलाफ यह मुहिम जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों को सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।