BU का नाम बदलने पर बवाल: विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) का नाम बदलकर "वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले का विरोध अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय का नाम…

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने पर सियासी घमासान, विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले का विरोध अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय का नाम बदलने के निर्णय पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

पुराने नाम को बरकरार रखने की मांग

आरिफ मसूद ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा है कि 38 साल पुरानी इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था की पहचान को मिटाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि यदि वे “वाग्देवी भोजपाल” के नाम से कोई संस्थान शुरू करना चाहते हैं, तो एक नया विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए, न कि मौजूदा ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का नाम बदला जाए।

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कार्य परिषद के प्रस्ताव पर उठे गंभीर सवाल

विधायक ने 3 जून 2026 को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा लिए गए निर्णय पर तीखे सवाल उठाए हैं। मसूद का आरोप है कि नाम बदलने के प्रस्ताव में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को जानबूझकर कमतर दिखाया गया है। प्रस्ताव में यह तर्क देना कि उनका जीवन विदेश में बीता और भोपाल के लिए उनका कोई विशेष योगदान नहीं है, एक महान देशभक्त का अपमान है।

मौलाना बरकतउल्ला भोपाली का ऐतिहासिक योगदान

आरिफ मसूद ने मौलाना बरकतउल्ला के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया:

  • गदर पार्टी: वर्ष 1913 में लाला हरदयाल के साथ मिलकर गदर पार्टी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
  • अंतरिम सरकार: 1 दिसंबर 1915 को काबुल में गठित स्वतंत्र भारत की पहली निर्वासित सरकार में वे प्रधानमंत्री थे।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: जापान में हिंदी भाषा के प्रचार और रूस में लेनिन से मुलाकात कर भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली है पहचान

ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि मौलाना बरकतउल्ला को केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त है। उनके अंतरराष्ट्रीय कद को दर्शाने वाले मुख्य बिंदु नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:

विषयविवरण
अंतिम विश्राम स्थलसैन फ्रांसिस्को, अमेरिका (महान राष्ट्रवादी नेता के रूप में सम्मानित)
वैश्विक सम्मानजर्मनी, रूस, जापान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
ऐतिहासिक महत्वस्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए भारत की आजादी की अलख जगाई।

राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील

विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप करने और विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर स्थापित संस्थानों की गरिमा बनाए रखना इतिहास के प्रति सम्मान का प्रतीक है। मसूद ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विरोध और अधिक तेज हो सकता है।