हरदा में किसानों का अनोखा प्रदर्शन: सिर पर मूंग रखकर निकाली रैली, 10वें दिन भी जारी रहा धरना
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले चल रहा यह धरना सोमवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान किसानों ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया, जिसने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा।
सोमवार को प्रदर्शनकारी किसान अपने सिर पर एक-एक किलो मूंग की थैलियां रखकर कृषि उपज मंडी से कलेक्ट्रेट तक रैली के रूप में पहुंचे। किसानों का यह प्रदर्शन सरकार द्वारा तय की गई खरीद सीमा के विरोध में था। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार द्वारा प्रति एकड़ निर्धारित की गई 1 क्विंटल 20 किलो मूंग की मात्रा को सांकेतिक रूप से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का प्रयास किया।
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खरीद सीमा पर किसानों का आक्रोश
किसानों का मुख्य विरोध सरकार द्वारा प्रति एकड़ मूंग खरीद की सीमा को बहुत कम रखने पर है। भारतीय किसान संघ के जिला प्रवक्ता राजनारायण गौर ने बताया कि जिले के 40 हजार से अधिक किसानों ने भीषण गर्मी के बावजूद मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की है।
- उत्पादन और खरीद में अंतर: प्रति एकड़ मूंग का वास्तविक उत्पादन 4 से 5 क्विंटल है, जबकि सरकार केवल 1.20 क्विंटल खरीद रही है।
- आर्थिक नुकसान: शेष फसल को किसानों को मजबूरी में कम दामों पर बाजार में बेचना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हो रही है।
- परिवहन की समस्या: किसानों का कहना है कि इतनी कम मात्रा के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया निकालना भी मुश्किल है।
आंदोलन की अगली रणनीति: जल सत्याग्रह और चक्काजाम
प्रशासनिक अनदेखी से नाराज किसान संगठनों ने आंदोलन को और अधिक धार देने का निर्णय लिया है। आगामी दिनों के लिए प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं:
| तिथि | आंदोलन का प्रकार | स्थान |
|---|---|---|
| 14 जुलाई | जल सत्याग्रह | हंडिया (नर्मदा तट) |
| 15 जुलाई | अनिश्चितकालीन चक्काजाम | नेशनल हाईवे |
भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भोपाल कूच करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं, आम किसान यूनियन भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके विरोध में 15 जुलाई से नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा। इसके लिए गांवों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगों में शत-प्रतिशत मूंग खरीद, खाद वितरण प्रणाली को सरल बनाना और वर्ष 2025 की सोयाबीन बीमा राशि का तत्काल भुगतान शामिल है। अब देखना यह होगा कि सरकार किसानों के इस बढ़ते दबाव पर क्या रुख अपनाती है।









