UP News: चिकित्सा पेशा नहीं, सेवा और राष्ट्रनिर्माण का पवित्र माध्यम: राज्यपाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने चिकित्सा जगत के नए चिकित्सकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरी का पेशा केवल एक आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह सेवा, संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक पावन संकल्प है। राज्यपाल ने युवाओं से…

चिकित्सा सेवा नहीं, राष्ट्रनिर्माण का पवित्र कार्य: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने चिकित्सा जगत के नए चिकित्सकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरी का पेशा केवल एक आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह सेवा, संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक पावन संकल्प है। राज्यपाल ने युवाओं से अपील की कि वे अपने अर्जित ज्ञान, विशेषज्ञता और मानवीय संवेदनाओं का उपयोग कर भारत को एक स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं, जो विश्व के लिए एक आदर्श बने।

द्वितीय दीक्षांत समारोह: 11 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधि

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के दूसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस गरिमामयी कार्यक्रम में कुल 11,053 विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही, विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले 32 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। सुविधा को ध्यान में रखते हुए, सभी उपाधियां डिजिटल रूप में ‘डिजिलॉकर’ पर भी उपलब्ध करा दी गई हैं।

सफलता का अर्थ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी

राज्यपाल ने इस अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके गौरवान्वित अभिभावकों और शिक्षकों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज और देश के प्रति बढ़ती जिम्मेदारियों का प्रतीक है। उन्होंने विशेष रूप से परिजनों से आग्रह किया कि वे घर की बेटियों और बहुओं की सफलता पर गर्व करें और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहें।

विवरण आंकड़े
कुल उपाधियां प्रदान की गईं 11,053
स्वर्ण पदक विजेता 32

आधुनिक तकनीक और चिकित्सा का समन्वय

राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी अपने करियर में सर्वोच्च शिखर को छूना चाहते हैं, तो उन्हें ज्ञान, अनुशासन और सेवाभाव को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ज्ञान उन्हें सक्षम बनाएगा, अनुशासन उन्हें उत्कृष्ट बनाएगा और सेवा की भावना उन्हें एक महान चिकित्सक के रूप में समाज में स्थापित करेगी।

उन्होंने आज के बदलते परिवेश में चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों का भी जिक्र किया। राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक सर्जरी, टेलीमेडिसिन और जीनोमिक्स जैसे नवाचार चिकित्सा जगत को नई दिशा दे रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे निरंतर खुद को अपडेट रखें। चिकित्सकों के कंधों पर केवल मरीजों के उपचार का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के भविष्य को सुरक्षित रखने का दायित्व है।

चिकित्सा धर्म की सच्ची सार्थकता

अंत में, राज्यपाल ने नवोदित डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे चिकित्सा को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि सेवा और संवेदना ही चिकित्सा धर्म की असली सार्थकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये युवा चिकित्सक अपने कौशल और मानवीय मूल्यों के बल पर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

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