बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती पर सीएम योगी सख्त, अधिकारियों को दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के हर नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसलों का संरक्षण और जनसामान्य की आजीविका की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। चाहे बाढ़ की स्थिति हो या सूखे का संकट, सरकार हर परिस्थिति में जनता के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में निर्देश दिए कि अनियमित बारिश के कारण उत्पन्न इन चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तत्परता दिखाई जाए और प्रभावितों तक समय रहते हर संभव मदद पहुंचाई जाए।
सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कम बारिश वाले इलाकों में खेती पर कोई बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि नहरों, जलाशयों और सरकारी नलकूपों का पूरी क्षमता के साथ उपयोग किया जाए। फसलों की बुआई और सिंचाई की स्थिति पर रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाए ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कृषि और सिंचाई विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार करें ताकि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को तत्काल राहत मिल सके।
राहत शिविरों में पुख्ता इंतजाम के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों में अगले तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविरों को पूरी तरह क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि इन शिविरों में स्वच्छ पेयजल, पौष्टिक भोजन और चिकित्सा की बेहतर सुविधा होनी चाहिए। बच्चों के लिए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की विशेष जरूरतों का ध्यान रखने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम
आपदा प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त कार्यालय के कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। हर घंटे की अपडेट मुख्यमंत्री कार्यालय और डीजीपी दफ्तर को भेजी जाएगी। तटबंधों की सुरक्षा के लिए लगातार पेट्रोलिंग की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ‘आपदा मित्रों’ की मदद ली जाएगी। वर्तमान में प्रदेश के 44 संवेदनशील जिलों में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं:
- राज्य में 1,694 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें 5.14 लाख लोगों को रखने की क्षमता है।
- राहत कार्यों के लिए 1,412 बाढ़ चौकियां और 549 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।
- बचाव कार्यों के लिए 55 नावों और मोटरबोट्स के साथ 910 पशु राहत शिविर भी सक्रिय किए गए हैं।
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