Hybrid: इलेक्ट्रिक नहीं, अब हाइब्रिड प्लेन का जमाना, सफर होगा सस्ता और लंबा


वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2.5% का योगदान देने वाले विमानन क्षेत्र में अब एक बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि पिपिस्ट्रेल के 'वेलिस इलेक्ट्रो' जैसे इलेक्ट्रिक विमानों ने शून्य उत्सर्जन और कम मेंटेनेंस के जरिए एक नई शुरुआत की है, लेकिन सीमित रेंज और भारी बैटरियों की समस्या ने इस इंडस्ट्री की…

एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव: पूरी तरह इलेक्ट्रिक से हाइब्रिड तकनीक की ओर बढ़ रही दुनिया

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2.5% का योगदान देने वाले विमानन क्षेत्र में अब एक बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि पिपिस्ट्रेल के ‘वेलिस इलेक्ट्रो’ जैसे इलेक्ट्रिक विमानों ने शून्य उत्सर्जन और कम मेंटेनेंस के जरिए एक नई शुरुआत की है, लेकिन सीमित रेंज और भारी बैटरियों की समस्या ने इस इंडस्ट्री की दिशा बदल दी है। अब विमान निर्माता कंपनियों का ध्यान पूरी तरह इलेक्ट्रिक विमानों के बजाय हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर केंद्रित हो गया है, जिसे कमर्शियल उड़ानों के लिए अधिक व्यावहारिक और किफायती माना जा रहा है।

इलेक्ट्रिक प्लेन की राह में चुनौतियां

पिपिस्ट्रेल का इलेक्ट्रिक विमान वर्तमान में केवल 50 मिनट तक ही उड़ान भरने में सक्षम है, जो इसे केवल पायलट ट्रेनिंग के लिए सीमित बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक विमानों की सबसे बड़ी बाधा उनकी बैटरी का वजन है। पारंपरिक विमान उड़ान के दौरान ईंधन खत्म होने से हल्के होते जाते हैं, लेकिन बैटरियों का वजन हमेशा एक जैसा रहता है। इसके अलावा, सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी आपात स्थिति के लिए विमान में अतिरिक्त ऊर्जा का होना अनिवार्य है। यदि लंबी दूरी के लिए पर्याप्त बैटरी लगाई जाए, तो विमान इतना भारी हो जाएगा कि उसमें यात्रियों या सामान के लिए जगह ही नहीं बचेगी।

हाइब्रिड विमान: भविष्य की नई उम्मीद

लंदन के फार्नबोरो एयर शो में उभरकर आए नए ट्रेंड्स के अनुसार, हाइब्रिड विमान ईंधन की खपत और परिचालन लागत में 40% से 50% तक की कटौती कर सकते हैं। इस दिशा में प्रमुख कंपनियों और संस्थानों की प्रगति इस प्रकार है:

  • हार्ट एयरोस्पेस: कैलिफोर्निया की यह कंपनी 30 सीटों वाला हाइब्रिड विमान विकसित कर रही है। यह बैटरी मोड पर 200 किमी और हाइब्रिड मोड में 800 किमी की दूरी तय करने में सक्षम है। इसमें प्रोपेलर को इलेक्ट्रिक मोटर चलाती है, जबकि गैस टर्बाइन जनरेटर के रूप में बिजली पैदा करता है।
  • जीई एयरोस्पेस और नासा: इन दोनों दिग्गज संस्थानों ने मिलकर साब 340बी हाइब्रिड विमान का सफल परीक्षण किया है। यह दुनिया का पहला ऐसा हाइब्रिड विमान है जिसने 30,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरी है।
  • वर्टिकल एयरोस्पेस: एयर टैक्सी और हेलीकॉप्टर के विकल्प के रूप में उभर रहे इलेक्ट्रिक क्राफ्ट्स को अधिक रेंज देने के लिए कंपनी अब हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही है।

निष्कर्ष: क्या हाइब्रिड तकनीक ही समाधान है?

भले ही ‘नेबोएयर’ जैसी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क खड़ा करने में जुटी हैं, लेकिन बड़े स्तर पर कमर्शियल एविएशन के लिए अभी भी हाइब्रिड मॉडल ही सबसे सटीक विकल्प नजर आ रहे हैं। टर्बोप्रॉप और इलेक्ट्रिक मोटर का तालमेल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह क्षेत्रीय उड़ानों को अधिक सुलभ और सस्ता बनाने की क्षमता भी रखता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में हो रहे बैटरी सुधारों के साथ मिलकर, हाइब्रिड तकनीक भविष्य के विमानन उद्योग की रीढ़ बनने की ओर अग्रसर है।


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