Tirumala: गर्भगृह में घंटी क्यों नहीं है? जानिए इसके पीछे का दिव्य रहस्य

Andhra Pradesh News: दुनिया भर में अपनी दिव्य भव्यता के लिए मशहूर तिरुमाला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। आमतौर पर हिंदू मंदिरों के गर्भगृह में पूजा-अर्चना के दौरान घंटी बजाने की परंपरा होती है, लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में घंटी का न होना एक…

तिरुपति मंदिर के गर्भगृह में घंटी क्यों नहीं है? जानिए इसके पीछे का रहस्य

Andhra Pradesh News: दुनिया भर में अपनी दिव्य भव्यता के लिए मशहूर तिरुमाला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। आमतौर पर हिंदू मंदिरों के गर्भगृह में पूजा-अर्चना के दौरान घंटी बजाने की परंपरा होती है, लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में घंटी का न होना एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। इस रहस्य के पीछे जहां एक तरफ महान वैष्णव संत श्री वेदांत देशिका से जुड़ी एक चमत्कारी लोककथा प्रचलित है, वहीं दूसरी तरफ प्राचीन ‘वैखानस आगम’ शास्त्र के कठोर नियम भी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। आइए जानते हैं इस रहस्य की पूरी कहानी।

धार्मिक मान्यताओं और लोक कथाओं के अनुसार, गर्भगृह में घंटी का न होना संत श्री वेदांत देशिका के जन्म से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्रोथम्बा और अनंत सूर्य नामक एक भक्त दंपत्ति ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान वेंकटेश्वर की कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और अपने हाथ की दिव्य घंटी प्रसाद के रूप में द्रोथम्बा को निगलने का निर्देश दिया। भगवान ने आशीर्वाद दिया कि उसी दिव्य अंश से उनके घर एक महापुरुष का जन्म होगा।

गायब हो गई मंदिर की मुख्य घंटी

अगली सुबह जब मंदिर के पुजारी गर्भगृह पहुंचे, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि मुख्य घंटी गायब थी। प्रारंभिक संदेह दंपत्ति पर गया, लेकिन मुख्य पुजारी को भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर स्पष्ट किया कि घंटी उन्होंने स्वयं द्रोथम्बा को दी है। माना जाता है कि उसी दिव्य घंटी के अंश से महान संत वेदांत देशिका का जन्म हुआ। इस घटना के बाद से तिरुमाला के गर्भगृह में दोबारा कोई घंटी नहीं लगाई गई।

  • संत वेदांत देशिका: उन्हें साक्षात भगवान की घंटी का अवतार माना जाता है।
  • विलक्षण प्रतिभा: उन्होंने ‘हयग्रीव स्तुति’ और ‘पादुका सहस्रम्’ जैसे महान ग्रंथों की रचना की।
  • अद्भुत शक्तियां: उन्होंने गरुड़ मंत्र और देवी लक्ष्मी की आराधना से कई चमत्कार किए और शत्रुओं को परास्त किया।

वैज्ञानिक और आगम शास्त्र के नियम

लोक कथाओं से हटकर यदि मंदिर के प्रशासनिक और शास्त्रीय पहलुओं को देखें, तो तिरुमाला मंदिर में ‘वैखानस आगम’ शास्त्र का पालन किया जाता है। टीटीडी (TTD) ने आधिकारिक रूप से घंटी न होने का कोई तकनीकी कारण नहीं बताया है, लेकिन मंदिरों की निर्माण शैली और पूजा पद्धति के अनुसार गर्भगृह की आंतरिक व्यवस्था अत्यंत गोपनीय और शास्त्र सम्मत रखी जाती है।

विजयनगर काल का घंटा मंडपम

मुख्य गर्भगृह में घंटी न होने के बावजूद, मंदिर के बाहर एक ऐतिहासिक ‘महामणि मंडपम’ स्थित है। इसका निर्माण 1461 ईस्वी में हुआ था। यहां दो विशाल घंटियां लगी हैं, जिन्हें विशेष तौर पर ‘घंटापानी’ नामक पुजारी द्वारा बजाया जाता है। जब भगवान को महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है, तब ये घंटियां गूंज उठती हैं।

विशेषता विवरण
मंडपम का नाम महामणि मंडपम (घंटा मंडपम)
निर्माण काल 1461 ईस्वी (विजयनगर साम्राज्य)
घंटी का समय महाप्रसाद भोग के दौरान

डिस्क्लेमर: यह लेख लोक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के आधिकारिक ग्रंथों या पौराणिक दस्तावेजों में इस कहानी का कोई लिखित उल्लेख नहीं मिलता है। इसे ऐतिहासिक सत्य के बजाय भक्तों की गहरी आस्था और परंपरा का हिस्सा माना जाना चाहिए।


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