सावन 2026Image Credit source: Getty Images
सावन 2026: महादेव की भक्ति का पावन महीना
सावन 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे उत्तम और पवित्र माना गया है। इस दौरान देश भर के शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते हैं और भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोलेनाथ को ये वस्तुएं इतनी प्रिय क्यों हैं? इसके पीछे न केवल गहरा धार्मिक महत्व है, बल्कि एक पौराणिक कथा भी जुड़ी है। आइए जानते हैं इस माह का महत्व और शिव पूजा से जुड़ी जानकारियां।
सावन 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। इस पूरे महीने शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और सोमवार के व्रतों का विशेष अनुष्ठान किया जाता है, जो भक्तों के कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है।
शिवजी को भांग और धतूरा क्यों अर्पित किया जाता है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तो उसकी प्रचंड ज्वाला से पूरी सृष्टि त्राहि-त्राहि कर उठी थी। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की उस अत्यधिक उष्णता (गर्मी) को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल, भांग, धतूरा और बेलपत्र अर्पित किए, जिनकी तासीर शीतल होती है। तभी से शिव पूजा में इन चीजों को अनिवार्य और प्रिय माना जाता है।
धतूरे और भांग का आध्यात्मिक महत्व
- धतूरा: धतूरे को विषैला माना जाता है, लेकिन शिवजी को यह अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इसे अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मन का भय दूर होता है।
- भांग: भांग को भगवान शिव का विशेष प्रसाद माना जाता है। इसे चढ़ाने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
शिव पूजा में उपयोग की जाने वाली प्रमुख सामग्री
| पूजन सामग्री | महत्व |
|---|---|
| जल/गंगाजल | अभिषेक और शीतलता के लिए |
| बेलपत्र | शिवजी को अत्यंत प्रिय |
| पंचामृत | दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण |
| सफेद चंदन | शीतलता और शांति का प्रतीक |
सावन में कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन के दौरान सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें। तत्पश्चात दूध, दही, शहद, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। अंत में शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें और घी का दीपक जलाकर आरती संपन्न करें। इस माह में सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करना भी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।
