Devshayani Ekadashi 2026: इन गलतियों से नाराज हो सकते हैं भगवान विष्णु, भूलकर भी न करें ये काम!

देवशयनी एकादशी 2026: तिथि और महत्वImage Credit source: Santosh Kumar/HT via Getty Images

देवशयनी एकादशी 2026: तिथि और महत्वImage Credit source: Santosh Kumar/HT via Getty Images

देवशयनी एकादशी: नियम और महत्व

हिंदू सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस पावन तिथि से भगवान विष्णु चार माह की अवधि के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। इन नियमों का पालन करने से भक्तों पर श्री हरि की विशेष कृपा बनी रहती है, जबकि इनकी अनदेखी करने से शुभ फलों में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी की सही तिथि, शुभ समय और वर्जित कार्यों के बारे में।

देवशयनी एकादशी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

विवरण समय/तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ 24 जुलाई 2026, सुबह 09:12 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे
व्रत पारण का समय 26 जुलाई 2026, सुबह 05:39 से 08:22 बजे तक

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करने चले जाते हैं। भगवान विष्णु के शयन काल के कारण अगले चार महीनों तक विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। यह समय आत्मचिंतन, जप, तप, व्रत और ईश्वर की भक्ति के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

देवशयनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये कार्य

  • तामसिक भोजन से परहेज: इस दिन मांस, मदिरा, अंडा और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन वर्जित है। सात्विक आहार ग्रहण करना ही श्रेयस्कर है।
  • चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल का सेवन करना शास्त्रों में निषेध बताया गया है, इसे व्रत के नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
  • अनादर न करें: इस दिन किसी भी बुजुर्ग, माता-पिता, साधु-संतों या जरूरतमंदों का अपमान न करें। ऐसा करने से विष्णु जी की कृपा से आप वंचित हो सकते हैं।
  • झूठ और छल से दूरी: इस पवित्र दिन पर किसी को धोखा देना या झूठ बोलना अत्यंत अशुभ माना गया है।
  • तुलसी पूजा के नियम: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। यदि आवश्यकता हो, तो एक दिन पूर्व ही पत्ते तोड़ लें।
  • मांगलिक कार्यों का निषेध: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है, अतः इस अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों की शुरुआत न करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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