Ashadha Vinayaka Chaturthi 2026: 17 या 18 जुलाई, कब है व्रत? जानें सही डेट और पूजा विधि

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026Image Credit source: Unplash

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आषाढ़ विनायक चतुर्थी 2026: कब है व्रत और क्या है इसका महत्व?

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इन दोनों ही तिथियों पर विधि-विधान के साथ गणपति की पूजा और उपवास करने की परंपरा है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘संकष्टी चतुर्थी’ और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘विनायक चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन विशेष दिनों पर बप्पा की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। इस वर्ष 17 जुलाई को भक्त यह व्रत रखेंगे। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि।

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026: तिथि और समय

द्रिक पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

विवरण समय
चतुर्थी तिथि प्रारंभ 17 जुलाई, सुबह 06:27 बजे
चतुर्थी तिथि समापन 18 जुलाई, सुबह 04:42 बजे

विशेष सूचना: इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। चंद्र दर्शन का निषेध समय सुबह 08:37 बजे से लेकर रात 09:33 बजे तक रहेगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

गणेश जी की पूजा के लिए मध्याह्न का समय सबसे उत्तम माना जाता है। 17 जुलाई को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक रहेगा। भक्तों को पूजा-अर्चना के लिए कुल 02 घंटे 45 मिनट का समय प्राप्त होगा।

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी: पूजा विधि

  • व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को शुद्ध करें और वहां भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • बप्पा को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
  • भोग में मोदक या लड्डू का विशेष रूप से प्रयोग करें।
  • धूप-दीप जलाकर ‘ओम गं गणपतये नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  • गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में श्रद्धाभाव से आरती संपन्न करें।
  • प्रार्थना करें कि भगवान गणेश आपके जीवन के सभी विघ्नों को दूर करें और परिवार में सुख-समृद्धि लाएं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हमारा संस्थान नहीं करता है।


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