अब घर बैठे मिलेगा रोजगार: श्रमिकों के लिए श्रम विभाग लाया ‘श्रम सेतु’ और ‘लेबर चौक’ ऐप
निर्माण और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। अब उन्हें काम की तलाश में लेबर चौक पर घंटों धूप और बारिश में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। श्रम विभाग ने ‘श्रम सेतु’ और ‘लेबर चौक’ नाम से दो अत्याधुनिक मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से श्रमिक अब अपने घर बैठे ही पंजीकरण करा सकेंगे और रोजगार के नए अवसर पा सकेंगे। इस पहल से दौसा जिले के करीब 79,889 रजिस्टर्ड श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
एप पर सीधे जुड़ेंगे श्रमिक और नियोक्ता
श्रम कल्याण अधिकारी विकास शर्मा ने बताया कि इन एप्स के माध्यम से रोजगार की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और तेज हो गई है। नियोक्ता (काम देने वाले) अब मोबाइल के जरिए अपनी जरूरत के अनुसार राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई और वेल्डर जैसे कुशल व अकुशल श्रमिकों को आसानी से खोज सकेंगे।
- श्रमिकों का विवरण: श्रमिक अपनी कार्यकुशलता, अनुभव और विशेषज्ञता की जानकारी एप पर अपलोड कर सकेंगे।
- सीधा संपर्क: काम देने वाले और श्रमिक मजदूरी, काम का समय और अन्य शर्तों पर सीधे बातचीत कर सकेंगे।
- पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
दौसा में 79,889 श्रमिकों को मिलेगी राहत
विकास शर्मा के अनुसार, दौसा जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों के कुल 79,889 श्रमिक विभाग के साथ पंजीकृत हैं। अब इन श्रमिकों को श्रमिक कार्ड डाउनलोड करने, आवेदन की स्थिति जानने या अन्य सरकारी सेवाओं के लिए दफ्तरों या ई-मित्र केंद्रों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विभाग ने इन एप्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लालसोट के जमात चौखटी और सिकंदरा चौराहा समेत प्रमुख लेबर चौकों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए हैं, जहां मौके पर ही रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी जा रही है।
मुफ्त रजिस्ट्रेशन और आसान उपयोग
श्रम निरीक्षक विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘श्रम सेतु’ एप पर निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण पूरी तरह से निशुल्क है। इन एप्स की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- बहुभाषी सुविधा: एप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं।
- विभिन्न प्रकार के श्रमिक: माली, पेंटर, वेल्डर, बढ़ई और प्लंबर सहित सभी तरह के कुशल-अकुशल श्रमिक जुड़ सकते हैं।
- सुविधाजनक सेवाएं: श्रमिक कार्ड डाउनलोड करने से लेकर आवेदन की ट्रैकिंग तक, सभी सेवाएं अब मोबाइल पर उपलब्ध हैं।
सरकार की यह डिजिटल पहल न केवल श्रमिकों के समय की बचत करेगी, बल्कि उन्हें उनके कौशल के अनुसार उचित रोजगार दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
