Tracking: जोधपुर में महंगे डिवाइस के कारण अटके परमिट, कल से चक्काजाम

राजस्थान में कॉमर्शियल वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाने के अनिवार्य नियम को लेकर परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टर्स के बीच गतिरोध गहरा गया है। डिवाइस की अत्यधिक कीमतों के विरोध में राज्य के कई जिलों में ट्रांसपोर्टर्स ने हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। जोधपुर में ट्रक ऑपरेटर्स ने चक्काजाम करने का निर्णय…


राजस्थान में ट्रांसपोर्टर्स का चक्काजाम: व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस की महंगी कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतरे ट्रक ऑपरेटर्स

राजस्थान में कॉमर्शियल वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाने के अनिवार्य नियम को लेकर परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टर्स के बीच गतिरोध गहरा गया है। डिवाइस की अत्यधिक कीमतों के विरोध में राज्य के कई जिलों में ट्रांसपोर्टर्स ने हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। जोधपुर में ट्रक ऑपरेटर्स ने चक्काजाम करने का निर्णय लिया है, जिससे परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

सरकार द्वारा तय कंपनियों के डिवाइस 10 गुना महंगे

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि वे सुरक्षा मानकों के तहत ट्रैकिंग डिवाइस लगाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित कंपनियों के डिवाइस बाजार भाव से कहीं ज्यादा महंगे हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार ने जिन कंपनियों से एमओयू किया है, वे एक डिवाइस के लिए 30 से 35 हजार रुपये तक वसूल रही हैं। इसके विपरीत, बाजार में उपलब्ध अन्य प्रमाणित कंपनियों के डिवाइस मात्र 4 से 5 हजार रुपये में मिल रहे हैं।

विवरण अनुमानित लागत
सरकारी लिस्टेड कंपनियों के डिवाइस 30,000 – 35,000 रुपये
बाजार में उपलब्ध OEM डिवाइस 4,000 – 5,000 रुपये

परमिट और फिटनेस पर संकट

परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वाहनों में वीएलटीडी नहीं लगेगा, तब तक न तो परमिट रिन्यू किए जाएंगे और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होगा। इस नियम के कारण राजस्थान भर में करीब 10 हजार से अधिक कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस अटकी हुई है। केवल जोधपुर में ही 1,500 से अधिक वाहन मालिक इस समस्या से जूझ रहे हैं।

हड़ताल का असर और प्रमुख मांगें

  • चक्काजाम की तैयारी: जोधपुर की दो प्रमुख एसोसिएशन, ‘सूर्यनगरी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑनली वेलफेयर सोसायटी’ और ‘जोधपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन’ ने साझा संघर्ष समिति बनाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है।
  • प्रभावित वाहन: यदि हड़ताल पूरी तरह लागू होती है, तो जोधपुर आरटीओ से जुड़े 50 हजार से अधिक ट्रक चालक प्रभावित होंगे।
  • मुख्य मांग: ट्रांसपोर्टर्स की मांग है कि उन्हें सरकार द्वारा थोपी गई कंपनियों की बाध्यता से मुक्त किया जाए। वे चाहते हैं कि अन्य राज्यों (जैसे उत्तराखंड, कर्नाटक और यूपी) की तर्ज पर उन्हें बाजार से किफायती दरों पर डिवाइस खरीदने की छूट दी जाए।

ट्रांसपोर्टर्स का तर्क है कि डीजल की बढ़ती कीमतों और टोल टैक्स के बोझ तले दबे वाहन मालिकों के लिए 30-35 हजार रुपये का खर्च उठाना नामुमकिन है। साथ ही, हर साल डिवाइस के रिन्यूअल का खर्च भी उनके व्यवसाय को आर्थिक रूप से कमजोर कर रहा है। आज शाम होने वाली बैठक में हड़ताल की आगे की रणनीति और सरकार के साथ वार्ता पर चर्चा की जाएगी।



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