Politics: कौन हैं वो नेताजी जिन्हें विरोधी ‘गैंडा स्वामी’ बुलाते हैं?

राजस्थान में इन दिनों मानसून की बारिश से ज्यादा चर्चा सरकारी दफ्तरों में हो रहे तबादलों की है। आलम यह है कि न बादलों से राहत मिल रही है और न ही प्रशासन द्वारा जारी की गई तबादला सूचियों से। कहीं एक पद पर दो अधिकारियों को बिठा दिया गया है, तो कहीं स्वर्ग सिधार…

राजस्थान की सियासत और ब्यूरोक्रेसी: तबादलों का ‘अजीबोगरीब’ खेल और ‘गैंडा स्वामी’ का आत्मविश्वास

राजस्थान में इन दिनों मानसून की बारिश से ज्यादा चर्चा सरकारी दफ्तरों में हो रहे तबादलों की है। आलम यह है कि न बादलों से राहत मिल रही है और न ही प्रशासन द्वारा जारी की गई तबादला सूचियों से। कहीं एक पद पर दो अधिकारियों को बिठा दिया गया है, तो कहीं स्वर्ग सिधार चुके सरकारी कर्मचारी का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। आज के इस विशेष अंक में हम आपको राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की कुछ ऐसी ही दिलचस्प और हैरान करने वाली खबरें पढ़ाएंगे।

तबादला लिस्ट में ‘भारी चूक’: कहीं एक पद पर दो अफसर, तो कहीं मरे हुए कर्मचारी का ट्रांसफर

हाल ही में जारी हुई तबादला सूचियों ने प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गलतियों का स्तर इतना गिर चुका है कि अधिकारी भी अब हैरान हैं। इसकी कुछ प्रमुख बानगी नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:

मामला क्या हुआ?
डीग का पटवारी पटवारी ने ट्रांसफर की अर्जी दी, लेकिन विभाग ने पटवारी के बजाय विधायक का ही नाम ट्रांसफर लिस्ट में डाल दिया।
टोंक (दूनी) तहसील एक ही कुर्सी पर विपुल चौधरी और अजय कुमार पांडेय, दोनों को तहसीलदार नियुक्त कर दिया गया।
अजीबोगरीब आदेश किशनगढ़ के नायब तहसीलदार को एक साथ परबतसर और कुचामन, दोनों जगह ट्रांसफर कर दिया गया।
हद तो तब हो गई प्रशासन ने उन ASI अनोपारामजी का भी तबादला कर दिया, जिनका निधन हो चुका है।

जब नेताजी ने खुद को बताया ‘कलियुग का कृष्ण’

अलवर की राजनीति में एक ऐसे भाजपा नेता चर्चा में हैं, जिन्हें उनके विरोधी ‘गैंडा स्वामी’ और ‘कालिया नाग’ जैसे नामों से बुलाते हैं। हालांकि, इन टिप्पणियों से नेताजी का मनोबल जरा भी कम नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अगर भगवान ने उन्हें कृष्ण जैसा काला रंग दिया है, तो वे ‘कलियुग के कृष्ण’ हैं। उनका मानना है कि जो भी उनके चक्र के दायरे में आएगा, वह बच नहीं पाएगा। नेताजी का कहना है कि आदमी का रंग नहीं, उसके कारनामे और मन साफ होना चाहिए। निकाय और पंचायत चुनाव करीब होने के कारण उनका यह ‘कॉन्फिडेंस’ अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस की वर्दी में छिपी ‘सुरमई आवाज’ और ‘मिजाज’

अक्सर पुलिस की भाषा को कड़क और सख्त माना जाता है, लेकिन राजस्थान पुलिस में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जो अपनी कार्यशैली और मधुर व्यवहार से लोगों का दिल जीत रहे हैं:

  • ट्रैफिक पुलिस का अंदाज: हनुमानगढ़ के अनिल चिंदा ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों को इतने सभ्य और मनोरंजक ढंग से जागरूक करते हैं कि मुख्यमंत्री ने भी उन्हें सम्मानित किया है। वहीं, जयपुर के प्रवीण कुमार (पी.के.) अपने मजाकिया अंदाज के लिए मशहूर हैं।
  • वर्दी में सुरीली ममता: चूरू जिले के मेलुसर गांव की ममता सोनगरा दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं। उनका सिंगिंग टैलेंट इतना शानदार है कि उन्होंने मशहूर सिंगर अनुराधा पौडवाल और मीका सिंह जैसे दिग्गजों से भी सराहना पाई है।

यह स्पष्ट है कि कानून की हिफाजत करने वाली वर्दी के नीचे भी इंसान का एक कोमल और कलात्मक पहलू मौजूद होता है, जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं।


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