सीहोर में मौत का साया: जर्जर स्कूल भवन बना ‘काल’, प्रशासन की अनदेखी से बड़ा हादसा होने की आशंका
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अहमदपुर गांव में स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का पुराना भवन इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह जर्जर इमारत अब पढ़ाई का केंद्र न रहकर एक बड़े हादसे को न्योता दे रही है। हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग ने इस खतरनाक भवन को ध्वस्त करने के आदेश एक साल पहले ही जारी कर दिए थे, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते आज भी यह जर्जर ढांचा वैसे ही खड़ा है, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।
बच्चों की जान खतरे में: क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का कर रहा है इंतजार?
वर्तमान में स्कूल की पढ़ाई नए भवन में सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन पुराना जर्जर भवन अभी भी परिसर में ही मौजूद है। खाली पड़े इस भवन की छतें और दीवारें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अक्सर खेल-खेल में इस खतरनाक इमारत के आसपास या उसके भीतर चले जाते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में इमारत के ढहने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप: लकड़ी की लूट, भवन गिराने में चुप्पी
ग्रामीणों ने विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर भवन से सागौन की बेशकीमती लकड़ियों और अन्य उपयोगी सामानों को तो समय रहते निकाल लिया गया, लेकिन भवन को गिराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों के अनुसार, यदि समय रहते इस ढांचे को नहीं हटाया गया, तो भविष्य में होने वाले किसी भी हादसे की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की होगी।
अधिकारियों और पंचायत का पक्ष
| संबंधित अधिकारी/पक्ष | बयान/स्थिति |
|---|---|
| मिलन मालवीय (संकुल प्रभारी) | भवन को ध्वस्त करने के निर्देश एक साल पहले दिए जा चुके हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। |
| धर्मेंद्र पाठक (पंचायत सचिव) | भवन को तोड़ने का ठेका पहले ही दिया जा चुका है। जल्द ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। |
मुख्य बिंदु:
- भवन की स्थिति: स्कूल का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर, किसी भी समय गिरने की आशंका।
- प्रशासनिक देरी: एक साल पहले मिले थे ध्वस्तीकरण के आदेश, आज भी अमल बाकी।
- सुरक्षा का खतरा: स्कूल परिसर में बच्चों का आना-जाना बना हुआ है जान का जोखिम।
- ग्रामीणों का आक्रोश: कीमती सामान निकालने में दिखाई फुर्ती, भवन हटाने में बरती जा रही लापरवाही।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पंचायत और शिक्षा विभाग के दावों के बाद यह जर्जर इमारत कब तक जमीनदोज होती है, या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे के घटित होने का इंतजार कर रहा है।
