भरतपुर: हाईकोर्ट से सरपंच स्नेहलता को बड़ी राहत, पदमुक्ति आदेश पर लगाई रोक
राजस्थान के भरतपुर जिले की पथैना ग्राम पंचायत की सरपंच स्नेहलता को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उनके पदमुक्ति आदेश पर हाईकोर्ट ने स्टे (रोक) लगा दिया है। इस फैसले के बाद से सरपंच खेमे में खुशी की लहर है। ज्ञात हो कि राज्य सरकार के अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव त्रिलोक चंद मीणा ने 3 जुलाई को स्नेहलता को सरपंच पद से हटाने के निर्देश दिए थे, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की शुरुआत 23 जून को हुई थी, जब जिला परिषद की एक टीम ने पथैना ग्राम पंचायत का औचक निरीक्षण किया था। टीम का मुख्य उद्देश्य पंचायत का आधिकारिक रिकॉर्ड जब्त करना था। इस दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीणों और सरपंच के पति ने कार्रवाई का भारी विरोध किया। करीब दो घंटे तक चले गतिरोध और हंगामे के बाद आखिरकार टीम रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने में सफल रही।
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सरकार ने लगाए थे गंभीर आरोप
जिला परिषद की रिपोर्ट के आधार पर, 3 जुलाई को राज्य सरकार ने स्नेहलता को पद से हटा दिया था। सरकार द्वारा जारी आदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप लगाए गए थे:
- ग्राम पंचायत के राजकीय कार्यों का सही ढंग से संपादन न करना।
- अपने पद का दुरुपयोग करना।
- प्रशासनिक नियमों की अवहेलना करना।
सरपंच पति ने उठाए सवाल
वहीं, इस पूरे मामले पर सरपंच स्नेहलता के पति ब्रजेश सिंह ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि 22 जून को क्षेत्र में जाट आरक्षण को लेकर एक ‘हुंकार सभा’ आयोजित की गई थी, जो काफी सफल रही। ब्रजेश सिंह का आरोप है कि प्रशासन और सरकार इस सभा को विफल करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन जब वे इसमें नाकाम रहे, तो बौखलाहट में यह कार्रवाई की गई। हालांकि, इस दावे पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संबंधित अधिकारी | सरपंच स्नेहलता, पथैना ग्राम पंचायत |
| पदमुक्ति आदेश तिथि | 3 जुलाई |
| हाईकोर्ट का रुख | पदमुक्ति आदेश पर स्टे (रोक) |
| मुख्य आरोप | पद का दुरुपयोग और कार्य में लापरवाही |
हाईकोर्ट से मिली इस राहत के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी सुनवाई में राज्य सरकार अपना पक्ष किस प्रकार रखती है और इस मामले का अंतिम परिणाम क्या होता है।









