School Crisis: जर्जर स्कूल में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे बच्चे


सलूंबर के जोधसागर की भागल स्थित राजकीय विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्कूल के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिनकी दीवारों में गहरी दरारें हैं और छत से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे…

सलूंबर: सरकारी स्कूल के जर्जर कमरों में जान जोखिम में डाल रहे मासूम, छत से गिर रहा प्लास्टर

सलूंबर के जोधसागर की भागल स्थित राजकीय विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्कूल के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिनकी दीवारों में गहरी दरारें हैं और छत से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छात्र बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां टूटी हुई पट्टियों को लकड़ी के सहारे रोका गया है।

एक कमरे में दो कक्षाएं, बरामदे में बैठ रहे छात्र

विद्यालय के प्रधानाचार्य रूपेश कुमार लड़ोती के अनुसार, स्कूल में कुल 157 बच्चे पंजीकृत हैं। आठ कमरों वाले इस भवन में से दो कमरों को पिछले साल अक्टूबर में ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। कमरों की कमी के कारण अब बाकी बचे छह कमरों में ही शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है, जिसमें एक कमरा प्रधानाचार्य का है।

  • कक्षाओं का प्रबंधन: जगह की कमी के कारण कक्षा 4 और कक्षा 6 के छात्रों को बरामदे में बिठाया जा रहा है। बारिश के मौसम में कक्षा 4 को कक्षा 5 के साथ और कक्षा 6 को कक्षा 7 के साथ एक ही कमरे में बिठाना पड़ता है।
  • सुरक्षा के इंतजाम: कक्षा 6 के बाहर बरामदे की पट्टी पिछले एक साल से टूटी हुई है। दुर्घटना से बचाव के लिए वहां रस्सी बांधकर और कांटेदार झाड़ियां डालकर घेराबंदी की गई है।

प्रस्ताव भेजने के बावजूद प्रशासन खामोश

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि जर्जर कमरों की मरम्मत के लिए विभाग को कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीईओ कमलेश ने पुष्टि की है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है।

वहीं, स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शंकरलाल मीणा और रामलाल मीणा जैसे अभिभावकों का कहना है कि वे इस संबंध में कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


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