नागौर में निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन: शिक्षा संबल कार्यक्रम और निरीक्षण के विरोध में घेराव
राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए शिक्षा संबल कार्यक्रम और निजी स्कूलों के औचक निरीक्षण संबंधी निर्देशों के खिलाफ बुधवार को नागौर के निजी स्कूल संचालकों ने मोर्चा खोल दिया। नागौर जिला प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले जिले भर के करीब 600 निजी स्कूलों के संस्था प्रधान एकत्रित हुए और जिला शिक्षा कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी अनुज भारद्वाज को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष माणक चौधरी, सचिव विनेश शर्मा और कार्याध्यक्ष प्रह्लाद चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का सम्मान करना चाहिए और अनावश्यक हस्तक्षेप बंद करना चाहिए।
सरकार पर लगे गंभीर आरोप और लंबित भुगतान
ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष अपनी कई प्रमुख मांगें और समस्याएं रखीं। संचालकों का आरोप है कि शिक्षा संबल कार्यक्रम निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में बाधा डाल रहा है। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं का उल्लेख किया गया है:
- आरटीई भुगतान: आरटीई पोर्टल पर पिछले 4 वर्षों से बकाया भुगतान का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।
- अनावश्यक जांच: स्कूलों में बार-बार की जा रही जांच से शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
- प्रशासनिक स्वायत्तता: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि निजी स्कूलों को अपने प्रशासन का पूरा अधिकार है।
जिला स्तरीय समस्याओं का विवरण
स्कूल संचालकों ने ज्ञापन में उन तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को भी रेखांकित किया जो उन्हें हर दिन परेशान करती हैं। इसका विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| समस्या का प्रकार | प्रमुख बिंदु |
|---|---|
| भौतिक सत्यापन | समय पर सत्यापन नहीं होने से मान्यता संबंधी संकट। |
| फीस नीति | 10 प्रतिशत वार्षिक फीस वृद्धि पर सरकार की आपत्तियां। |
| पोर्टल संबंधी | मान्यता और रिपोर्टिंग में तकनीकी बाधाएं। |
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
एसोसिएशन ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निरीक्षण संबंधी आदेश और संबंधित एप्लिकेशन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न केवल न्यायालय की शरण लेंगे, बल्कि राज्यव्यापी आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे।









