अशोकनगर में प्रशासन का बुलडोजर: सरकारी जमीन पर बसी अवैध कॉलोनी ध्वस्त, 2.20 करोड़ की भूमि मुक्त
अशोकनगर जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने बुधवार को एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। तहसीलदार भारतेंदु यादव की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम शंकरपुर पछार में धावा बोला और करीब 1.118 हेक्टेयर (लगभग साढ़े पांच बीघा) शासकीय भूमि को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराया। बाजार भाव के अनुसार, इस बेशकीमती जमीन की अनुमानित कीमत 2 करोड़ 20 लाख रुपए आंकी गई है।
अवैध निर्माण और बुनियादी ढांचे को किया गया नष्ट
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनी के निशान मिटा दिए गए। टीम ने जेसीबी की मदद से कॉलोनी के अंदर बनाई गई मुरम की सड़क को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके अलावा, अवैध रूप से लगाए गए बिजली के खंभों को भी उखाड़ फेंका गया। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन को निजी प्लॉट बताकर कुछ लोगों को पहले ही बेचा जा चुका था।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल मुक्त कराई गई भूमि | 1.118 हेक्टेयर (साढ़े पांच बीघा) |
| अनुमानित बाजार मूल्य | 2.20 करोड़ रुपए |
| प्रभावित सर्वे क्रमांक | 52, 114 और 115 |
आरोपी पर सख्त कार्रवाई के संकेत
तहसीलदार भारतेंदु यादव ने बताया कि यह कार्रवाई तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश (प्रकरण क्रमांक 69/अ-68/25-26) के तहत की गई है। इस अवैध कॉलोनी को बसाने का मुख्य आरोपी रामस्वरूप पुत्र श्यामलाल प्रजापति है। प्रशासन ने अब इस भूमि पर ‘शासकीय स्वामित्व’ का बोर्ड लगाने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में कोई फिर से अतिक्रमण न कर सके।
- धोखाधड़ी की जांच: प्रशासन उन लोगों के बयानों की भी जांच कर रहा है जिन्हें ये प्लॉट बेचे गए थे।
- कानूनी शिकंजा: यदि जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो आरोपी रामस्वरूप प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशासन का संदेश: सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, प्रशासन ने पूरी जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है और इस पूरे मामले की गहन जांच जारी है। इस कार्रवाई से भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।










