RGHS OPD नियमों का विरोध: नए बदलावों को बताया कर्मचारी विरोधी, मांगें तेज

राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नए आदेश के मुताबिक, अब ओपीडी में 2 हजार रुपए से अधिक की जांच करवाने के लिए पहले से प्री-अप्रूवल (पूर्व अनुमति) लेना अनिवार्य कर दिया…

आरजीएचएस (RGHS) के नए नियमों से बढ़ा कर्मचारियों और पेंशनर्स का तनाव

राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नए आदेश के मुताबिक, अब ओपीडी में 2 हजार रुपए से अधिक की जांच करवाने के लिए पहले से प्री-अप्रूवल (पूर्व अनुमति) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले का प्रदेश भर में विरोध शुरू हो गया है और शिक्षक संघ ‘रेसटा’ (REST) ने इसे मरीजों के हितों के खिलाफ बताया है।

क्यों हो रहा है नए आदेश का विरोध?

शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने इस फैसले को अव्यावहारिक करार दिया है। उनका कहना है कि आरजीएचएस योजना का मूल उद्देश्य मरीजों को त्वरित और सुगम चिकित्सा सुविधा देना था, लेकिन यह नई शर्त पूरी प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना देगी। संगठन ने इस विरोध के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण बताए हैं:

  • पेंशनर्स की परेशानी: अधिकांश पेंशनर्स वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्हें अक्सर एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचों की जरूरत पड़ती है, जिनका खर्च 6 से 8 हजार रुपए तक होता है।
  • इलाज में देरी: पूर्व अनुमति मिलने में लगने वाले 3 से 6 घंटे के समय से गंभीर मरीजों के उपचार में देरी हो सकती है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।
  • तकनीकी बाधाएं: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

प्री-अप्रूवल प्रक्रिया और समय सीमा

नई गाइडलाइन के अनुसार, सरकार ने मंजूरी के लिए एक समय सीमा निर्धारित की है। यदि कोई मरीज पोर्टल पर प्री-ऑथराइजेशन का अनुरोध करता है, तो उसे लेकर निम्नलिखित नियम लागू होंगे:

स्थितिनिर्णय की समय सीमा
सामान्य जांचअधिकतम 3 घंटे
अत्यंत आवश्यक जांचशीघ्र निर्णय
समय सीमा समाप्त होने परऑटो अप्रूव (स्वत: मंजूरी)

सरकार से आदेश वापस लेने की मांग

शिक्षक संघ रेसटा के पदाधिकारियों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ाने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे मरीज को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सके। संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रमुख पदाधिकारियों में प्रदेश महामंत्री नवल सिंह मीणा, प्रवक्ता राजीव चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंसाराम खिजुरी और संरक्षक साफी मोहम्मद मंसूरी सहित अन्य कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे।

संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 2 हजार रुपए से अधिक की जांच पर पूर्व अनुमति की अनिवार्यता को खत्म नहीं किया गया, तो पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिकों को होने वाली परेशानी और बढ़ेगी। संगठन ने मांग की है कि कम से कम वरिष्ठ नागरिकों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह छूट दी जाए ताकि उन्हें बिना किसी विलंब के समय पर आवश्यक मेडिकल सहायता मिल सके।